वर्ल्ड डॉल्फिन डे: समुद्र की सेहत बताने वाला यह जीव आज खतरे में क्यों है
हर साल 12 सितंबर को मनाए जाने वाले वर्ल्ड डॉल्फिन डे पर जानिए क्यों समुद्री पर्यावरण के लिए डॉल्फिन का बचना जरूरी है और इसके सामने कौन-कौन से खतरे खड़े हैं
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हर साल 12 सितंबर का दिन दुनियाभर में 'वर्ल्ड डॉल्फिन डे' के तौर पर मनाया जाता है। समुद्र और नदियों में आजादी से तैरने वाला डॉल्फिन इंसानी सभ्यता और कुदरत को मिला एक अनोखा तोहफा माना जाता है। डॉल्फिन को दुनियाभर में बेहद समझदार, संवेदनशील और इंसानों से घुलमिल जाने वाले जीव के तौर पर जाना जाता है। लेकिन यह दिन सिर्फ इस खूबसूरत जीव की तारीफ करने के लिए नहीं है, बल्कि इसके वजूद पर मंडरा रहे खतरों की तरफ ध्यान खींचने और इसे बचाने के लिए ठोस कदम उठाने का संदेश देने के लिए भी मनाया जाता है।
समुद्री पर्यावरण में डॉल्फिन की जगह बहुत अहम मानी जाती है। पर्यावरण के जानकारों के मुताबिक, जिस समुद्र या नदी में डॉल्फिन की तादाद अच्छी होती है, वहां पानी की क्वालिटी और समुद्री जीवन सेहतमंद माना जाता है। यानी डॉल्फिन को समुद्र की सेहत का सीधा 'इंडिकेटर' कहा जा सकता है। इसलिए डॉल्फिन को बचाना सिर्फ एक जानवर को बचाना नहीं, बल्कि पूरे महासागर और पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखना है।
आज दुर्भाग्य से इंसान की बेलगाम गतिविधियों और बढ़ते प्रदूषण की वजह से डॉल्फिन की प्रजाति बड़े खतरे में आ गई है। समुद्र में हर रोज फेंका जाने वाला हजारों टन प्लास्टिक कचरा इन मासूम जीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। प्लास्टिक के टुकड़ों को खाना समझकर निगल लेने या समुद्र में फेंकी गई पुरानी मछली पकड़ने वाली जालों (घोस्ट नेट्स) में फंसकर हर साल हजारों डॉल्फिन का दम घुटने से मौत हो जाती है। इसके अलावा जहाजों की बढ़ती आवाजाही, समुद्र में शोर-प्रदूषण, बेतहाशा मछली पकड़ना और क्लाइमेट चेंज की वजह से बदलता समुद्र का तापमान, इन सबने डॉल्फिन के प्राकृतिक ठिकाने को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। कुछ देशों में कारोबारी फायदे और मनोरंजन के लिए डॉल्फिन का गैरकानूनी शिकार किया जाता है या उन्हें कैद में रखा जाता है। इन सारी दिक्कतों की वजह से दुनियाभर की नदियों और समुद्रों में डॉल्फिन की तादाद तेजी से घट रही है।
वर्ल्ड डॉल्फिन डे के मौके पर दुनियाभर के पर्यावरण संगठन, समुद्री रिसर्च संस्थाएं और सरकारें खास कंजर्वेशन मुहिम चलाती हैं। स्कूल, कॉलेज, सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए युवाओं और आम लोगों में समुद्र की सफाई को लेकर जागरूकता फैलाई जाती है। हम अपने स्तर पर भी इस काम में बड़ा योगदान दे सकते हैं। समुद्र किनारे या नदी किनारे घूमते वक्त प्लास्टिक कचरा न फेंकना, प्लास्टिक का इस्तेमाल टालना और डॉल्फिन के खेल या शो का व्यावसायिक तमाशा न देखना, जैसी छोटी-छोटी बातों से भी इन जीवों को बचाने में मदद मिलती है। डॉल्फिन बचेगा तभी हमारा महासागर और समुद्री जीवन जिंदा रह पाएगा, यही संदेश यह अहम दिन हमें देता है।