त्योहारों में लेजर-डीजे का धमाल आंख-कान के लिए खतरनाक, डॉक्टरों की चेतावनी
तेज लेजर बीम रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है, वहीं डीजे का तेज शोर सुनने की ताकत छीन सकता है, डॉक्टरों ने बताया।
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त्योहारों के मौसम में रोशनी की चकाचौंध और डीजे की धुन पर थिरकती भीड़ अब हर सार्वजनिक उत्सव का हिस्सा बन गई है। मगर कुछ पलों के मजे के लिए कहीं लोग अपनी आंखों और कानों की सेहत तो दांव पर नहीं लगा रहे, यह सवाल अब गंभीरता से पूछा जाने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि तेज लेजर किरणें और बेहिसाब तेज आवाज सीधे आंख के पर्दे यानी रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती हैं, और कान की नाजुक कोशिकाओं को भी हमेशा के लिए खराब कर सकती हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक लेजर की रोशनी आम रोशनी से ज्यादा केंद्रित होती है। अगर तेज लेजर किरण सीधे आंख में पड़ जाए तो वह रेटिना पर बहुत तेजी से केंद्रित होकर जलने जैसी चोट पहुंचा सकती है। इसका नतीजा यह हो सकता है कि आंखों के सामने काला धब्बा दिखने लगे, नजर धुंधली हो जाए, या फिर स्थायी तौर पर "ब्लाइंड स्पॉट" यानी न दिखने वाला हिस्सा बन जाए।
खास बात यह है कि शुरुआत में दर्द न होने की वजह से यह चोट अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। दूसरी तरफ, डीजे, बड़े स्पीकर और जुलूसों में लगातार बजने वाला कान फाड़ू शोर कान की नाजुक कोशिकाओं पर दबाव डालता है। कान में सीटी बजना या भनभनाहट होना, कान बंद जैसा महसूस होना और कुछ देर के लिए कम सुनाई देना, ये सब खतरे के शुरुआती लक्षण हैं। बार-बार तेज आवाज के संपर्क में रहने से सुनने की ताकत स्थायी रूप से कम हो सकती है।
केईएम अस्पताल के पूर्व डीन डॉ. अविनाश सुपे ने बताया कि जैसे-जैसे आवाज की तीव्रता बढ़ती है, वैसे-वैसे सुरक्षित रूप से उसके संपर्क में रहने का समय कम होता जाता है। इसलिए स्पीकर से दूरी बनाए रखना, तेज आवाज में ज्यादा देर न रुकना और कानों को बीच-बीच में आराम देना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि पुणे और नागपुर जैसे शहरों में त्योहारों के दौरान लेजर बीम के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई है। लोगों की सुरक्षा के लिहाज से ऐसे नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत जताई जा रही है।
डॉ. सुपे ने आगे कहा कि त्योहार का आनंद जरूर लें, लेकिन आंख और कान की सेहत की कीमत पर नहीं। उनकी सलाह है कि लेजर किरणें सीधे आंखों की तरफ न घुमाई जाएं और डीजे के स्पीकर के पास ज्यादा देर तक खड़े न रहें। अगर नजर में अचानक कोई बदलाव महसूस हो या कान में लगातार आवाज गूंजती रहे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। उत्सव की रोशनी आंखों के लिए सुरक्षित रहे और संगीत कानों के लिए सुखद बना रहे, यही इस त्योहारी सीजन का सबसे बड़ा सेहत का संकल्प होना चाहिए।