रायगड में महायुति के भीतर फिर टकराव, थोरवे ने तटकरे पर लगाया कंपनियों को धमकाने का आरोप
खालापुर में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने रायगड में महायुति के अंदर फिर सियासी तनाव खड़ा कर दिया है।
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रायगड जिले में महायुति के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा, यह एक बार फिर सामने आया है। शिवसेना के शिंदे गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की जो बात चल रही थी, वह अब और तीखी हो गई है। खालापुर में रोजगार के मुद्दे पर छिड़े इस सियासी विवाद में कर्जत से शिवसेना शिंदे गुट के विधायक महेंद्र थोरवे ने राष्ट्रवादी के सांसद सुनील तटकरे पर सीधा निशाना साधा है।
दरअसल खालापुर के स्थानीय युवाओं को कंपनियों में नौकरी मिले, इस मांग को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुधाकर घारे की अगुवाई में एक आंदोलन किया गया था। इसी आंदोलन पर निशाना साधते हुए थोरवे ने कहा कि यह पूरा मामला अपनी झोली भरने के लिए की गई स्टंटबाजी के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ही दिनों में सबको पता चल जाएगा कि असल में यह मामला क्या था।
महेंद्र थोरवे यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि खालापुर की कंपनियों को राष्ट्रवादी की तरफ से परेशान किया जा रहा है। थोरवे का कहना है कि जब कंपनियां स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए काम कर रही हैं, ऐसे में अगर कोई उन कंपनियों को बंद करवाने की कोशिश करेगा तो उसे जैसे को तैसा जवाब दिया जाएगा। यह इशारा सीधे-सीधे राष्ट्रवादी की तरफ था।
इस पूरे विवाद ने रायगड में महायुति के भीतर की गुटबाजी को फिर चर्चा में ला दिया है। कुछ दिन पहले ही रोजगार को लेकर हुए इस आंदोलन में राष्ट्रवादी की तरफ से कंपनियों में स्थानीय लोगों को नौकरी देने की मांग उठाई गई थी। इसी आंदोलन के बाद सुनील तटकरे ने भी बीच में पड़कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस बारे में बातचीत की थी।
रायगड में शिवसेना और राष्ट्रवादी के बीच यह टकराव कोई नई बात नहीं है। पालक मंत्री पद, विधान परिषद चुनाव, स्थानीय राजनीति और विकास कार्यों के श्रेय को लेकर दोनों पार्टियों के बीच पहले भी कई बार तनातनी हो चुकी है।
विधान परिषद चुनाव के समय शिवसेना शिंदे गुट ने अपना उम्मीदवारी फॉर्म वापस ले लिया था, जिसके बाद अनिकेत तटकरे के बिना किसी मुकाबले के जीतने का रास्ता साफ हो गया था। लेकिन इसके बाद भी दोनों पार्टियों के बीच सियासी खींचतान थमती नजर नहीं आ रही।
अब महेंद्र थोरवे के इस ताजा आरोप के बाद रायगड में महायुति के अंदर का यह विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है। थोरवे के इन आरोपों पर राष्ट्रवादी की तरफ से क्या जवाब आता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।