रशिया से तेल खरीदने वालों पर ट्रम्प का 100% टैक्स प्लान, भारत-चीन निशाने पर
अमेरिकी संसद में पास हुए बिल से रशिया से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैक्स लग सकता है, भारत ने साफ की अपनी भूमिका
अमेरिका की संसद में एक ऐसा बिल पास हो चुका है जिसने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल मचा दी है। यह बिल कानून बन गया तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास एक बड़ी ताकत आ जाएगी, वो जिन देशों को चाहें रशिया से कच्चा तेल और नेचुरल गैस खरीदने पर 100% भारी-भरकम टैक्स लगा सकेंगे। इसका सीधा असर भारत और चीन जैसे बड़े देशों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। आम आदमी के लिए इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल-डीजल के दाम काफी बढ़ सकते हैं, और साथ ही कई दूसरी चीजें भी महंगी हो सकती हैं।
इस नए अमेरिकी कानून को नाम दिया गया है, लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026। अमेरिकी संसद के निचले सदन, यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस बिल को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव 214 के मुकाबले 211 वोटों से पास हुआ। इससे पहले अगस्त में ऊपरी सदन ने भी 86-11 के भारी बहुमत से इसे मंजूरी दे दी थी। अब बस राष्ट्रपति के आखिरी दस्तखत बाकी हैं, उसके बाद यह बिल कानून की शक्ल ले लेगा।
ट्रम्प के इस नए कानून का असली मकसद रशिया की आर्थिक रीढ़ तोड़ना है। अमेरिका चाहता है कि रशिया के एनर्जी सेक्टर से होने वाली कमाई पूरी तरह बंद हो जाए, ताकि वो यूक्रेन युद्ध में और पैसा न झोंक सके। इस कानून की मार रशिया से सबसे ज्यादा तेल-गैस खरीदने वाले टॉप पांच देशों पर पड़ेगी, इन देशों में भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं।
इन धमकियों के बीच भारत ने अपनी बात साफ रख दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो-टूक कहा है कि भारत अपनी जरूरतों, राष्ट्रीय हित और ग्लोबल मार्केट के भाव को देखते हुए ही रशिया से तेल खरीदता है। भारत और रशिया के एनर्जी सेक्टर में रिश्ते काफी पुराने और मजबूत हैं। दोनों देश सिविल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स पर भी लंबे वक्त से साथ काम कर रहे हैं, और भारत यह पार्टनरशिप आगे भी जारी रखना चाहता है।
यह मसला भारत के लिए भी गंभीर है, क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88% विदेश से मंगाता है, इसमें से 35% से ज्यादा तेल अकेले रशिया से आता है, क्योंकि रशिया भारत को सस्ते दाम पर तेल देता है। भारत अपनी बढ़ती डिमांड पूरी करने और साथ ही डिप्लोमैटिक बैलेंस बनाए रखने के लिए लगातार सस्ते एनर्जी ऑप्शन तलाशता रहता है।
अगर अमेरिका ने 100% टैक्स लगाया, तो इसका असर सिर्फ कच्चे तेल पर ही नहीं, बल्कि भारत के अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट पर भी पड़ेगा। अमेरिका कई भारतीय सामानों पर टैक्स बढ़ा सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, खासकर स्मार्टफोन, दवाइयां, कपड़ा उद्योग, जेम्स एंड ज्वेलरी और गाड़ियों के पार्ट्स की एक्सपोर्ट को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है।