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01:20 IST

न्यूझीलंड संसद में भारत के साथ मुक्त व्यापार करार पास, पीएम लक्सन ने जताई खुशी

न्यूझीलंड की संसद ने भारत-न्यूझीलंड मुक्त व्यापार करार को अंतिम मंजूरी दे दी है, जिसके बाद पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया।

न्यूझीलंड संसद में भारत के साथ मुक्त व्यापार करार पास, पीएम लक्सन ने जताई खुशी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

वर्ल्ड इकॉनॉमी और इंटरनेशनल ट्रेड के लिहाज से एक बड़ी खबर सामने आई है। न्यूझीलंड की संसद ने भारत-न्यूझीलंड मुक्त व्यापार करार (Free Trade Agreement - FTA) को अंतिम मंजूरी दे दी है। संसद में हुई वोटिंग में इस बिल के पक्ष में ९३ और विरोध में २९ वोट पड़े। ट्रेड और इन्वेस्टमेंट मिनिस्टर टॉड मॅक्ले ने यह ऑफिशियल जानकारी दी। संसद में मिले इस बड़े बहुमत से साफ पता चलता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते मजबूत करने को लेकर न्यूझीलंड कितना उत्सुक है।

इस ऐतिहासिक करार पर न्यूझीलंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने खुशी जताई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपनी भावनाएं शेयर करते हुए लिखा, "बहुत लोग मुझसे कहते थे कि भारत जैसे विशाल देश के साथ मुक्त व्यापार करार करना नामुमकिन है। लेकिन आज हमारी सरकार ने यह करके दिखाया है। संसद में इस करार को मिली मंजूरी हमारी इकॉनॉमिक पॉलिसी की बड़ी जीत है।" पीएम लक्सन ने आगे कहा कि इस करार से न्यूझीलंड के नागरिकों के लिए रोजगार के लाखों नए मौके बनेंगे और देश के वेतनमान में भी सुधार होगा। उनके मुताबिक भारत की १.४ अरब की बड़ी आबादी और तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास अब न्यूझीलंड के प्रोड्यूसर्स के लिए खुल जाएगा।

ट्रेड मिनिस्टर टॉड मॅक्ले की जानकारी के अनुसार, यह मुक्त व्यापार करार लागू होने के बाद न्यूझीलंड से भारत जाने वाले माल में से ५७ फीसदी माल पहले ही दिन पूरी तरह शुल्क मुक्त हो जाएगा। करार के चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह लागू होने के बाद करीब ९५ फीसदी प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी और टैरिफ या तो पूरी तरह हटा दिए जाएंगे या बहुत मामूली स्तर पर ले आए जाएंगे।

इसका सबसे ज्यादा फायदा न्यूझीलंड के मशहूर किवी (Kiwifruit) प्रोड्यूसर्स को मिलेगा। सिर्फ किवी इंडस्ट्री को ही अगले ५ साल में टैरिफ बचत के तौर पर करीब १२५ मिलियन न्यूझीलंड डॉलर की बचत होने का अनुमान है। इसके अलावा लकड़ी (Forestry), सेब, ऊन के कपड़े और दूसरे कृषि उत्पादों पर टैक्स कम होने से न्यूझीलंड के व्यापारी भारतीय बाजार में ज्यादा कॉम्पिटिटिव रेट पर अपना माल बेच पाएंगे।

इस करार में सिर्फ टैक्स कम नहीं किए गए हैं, बल्कि कस्टम क्लियरेंस तेजी से हो, इसके लिए भी खास सिस्टम बनाया जाएगा। भारत का तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास इस वक्त अच्छी क्वालिटी के खाने-पीने की चीजों, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, टूरिज्म और प्रोफेशनल सर्विसेज की भारी मांग कर रहा है। न्यूझीलंड की कंपनियों के लिए अब इन सभी सेक्टर्स में सीधे भारतीय ग्राहकों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। न्यूझीलंड सरकार ने २०३० तक भारत के साथ अपना द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का टारगेट रखा है, और यह एफटीए करार उस लक्ष्य का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है।

भारत और न्यूझीलंड के बीच इस करार को लेकर बातचीत की घोषणा मार्च २०२५ में हुई थी, और दोनों देशों ने काफी तेजी से बातचीत के दौर पूरे किए। न्यूझीलंड की संसद ने अपना बिल पास कर दिया है, लेकिन अब दोनों देश अपने-अपने यहां घरेलू मंजूरी की कानूनी औपचारिक प्रक्रिया (Ratification procedures) पूरी करेंगे। इस साल के अंत तक यह करार पूरी तरह लागू हो जाएगा, ऐसी उम्मीद दोनों सरकारों को है। भारत के लिए भी यह करार काफी फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि भारतीय प्रोडक्ट्स जैसे दवाइयां, टेक्सटाइल इंडस्ट्री, आईटी सर्विसेज और स्किल्ड मैनपावर को न्यूझीलंड में आसानी से एंट्री और शुल्क मुक्ति मिलेगी। कुल मिलाकर, इस करार से एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के आर्थिक समीकरण बदलने वाले हैं।

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