MPSC भर्ती सुधार समिति को 18 हजार सुझाव, छात्रों ने 90 दिन में नियुक्ति की मांग उठाई
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए बनी समिति को नागपुर सहित राज्यभर से हजारों सुझाव मिले, अभ्यर्थियों ने देरी और पेपर लीक पर गुस्सा जताया।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC और दूसरी सरकारी भर्ती परीक्षाओं में प्रक्रिया, पद्धति और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर सुधार के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति बनाई थी। इस समिति के पास राज्यभर के अभ्यर्थियों से अब तक 18,000 से ज्यादा ई-मेल और सुझाव पहुंच चुके हैं।
पुणे के बाद सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया नागपुर विभाग से आई, जहां से 7,600 ई-मेल मिले। इसके अलावा 400 से ज्यादा छात्रों और अभ्यर्थियों ने समिति से सीधे मिलकर अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। समिति की अध्यक्ष और राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव वी. राधा ने बताया कि यह देश में अपनी तरह का पहला मौका है जब कोई समिति छात्रों से सीधे बात कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी सुझावों को देखने के बाद समिति 3 महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
इस संवाद सत्र में अध्यक्ष वी. राधा के अलावा महाराष्ट्र पुलिस के महानिदेशक सदानंद दाते, सदस्य सचिव और मत्स्यपालन व पशु पालन विभाग के सचिव रामास्वामी, आईआईटी बॉम्बे के श्यामप्रसाद करगड्डे और यूपीएससी के पूर्व सदस्य (रिटायर्ड) अजीत भोसले मौजूद रहे।
समिति की अध्यक्ष वी. राधा ने खुद माना कि छात्रों की शिकायत है कि वे लगातार 5-5 साल तक मेहनत करते हैं, लेकिन 2 साल तक भर्तियां ही नहीं निकलतीं। जब परीक्षा होती भी है तो पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ जाते हैं। अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में देरी और नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर जमकर नाराजगी जताई।
वी. राधा ने यह भी साफ किया कि विशेष जांच दल यानी SIT की भूमिका अलग है, वह पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आपराधिक मामलों की जांच करके दोषियों पर कार्रवाई करेगी। वहीं इस उच्च स्तरीय समिति का मुख्य काम MPSC और दूसरी भर्ती प्रणालियों को मजबूत, आधुनिक और पारदर्शी बनाना है।
नागपुर जिले के बाद यह समिति अब नाशिक, छत्रपति संभाजीनगर और कोंकण क्षेत्र का दौरा करेगी, जिसके बाद 30 सितंबर को यह पूरी संवाद प्रक्रिया खत्म होगी।
अभ्यर्थियों ने समिति को पांच प्रमुख सुझाव दिए हैं। पहला, परीक्षा का ढांचा पारदर्शी हो, परीक्षा का स्तर सुधारा जाए और परीक्षाएं ऑफलाइन कराई जाएं। दूसरा, यूपीएससी की तरह हर साल परीक्षा कैलेंडर जारी हो और उसका सख्ती से पालन किया जाए। तीसरा, प्रश्नपत्रों की गलतियां दूर की जाएं और अंकन की निष्पक्ष प्रणाली अपनाई जाए। चौथा, चयन प्रक्रिया में 'ऑप्टिंग आउट' नीति को स्पष्ट और सुचारु तरीके से लागू किया जाए। पांचवां और सबसे अहम, अंतिम परिणाम घोषित होने के 90 दिनों के भीतर चुने गए उम्मीदवारों को पदस्थापना यानी नियुक्ति दी जाए।