मासिक शिवरात्रि: ९ सितंबर या १० सितंबर, जानिए सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और महत्व
भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि की सही तारीख, पूजा के शुभ मुहूर्त और भगवान शिव की पूजा के महत्व की पूरी जानकारी।
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भाद्रपद महीने की शिवरात्रि इस बार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि की शुरुआत ९ सितंबर से हो रही है, जबकि उदयतिथि के हिसाब से चतुर्दशी १० सितंबर को आती है। शिवरात्रि वाले दिन दोपहर में ही भाद्रपद महीना शुरू हो जाएगा। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि सितंबर की मासिक शिवरात्रि आखिर किस दिन मनाई जाए।
पंचांग के मुताबिक भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि बुधवार, ९ सितंबर को दोपहर १२:३० बजे शुरू होगी और यह तिथि गुरुवार, १० सितंबर की सुबह १०:३३ बजे तक रहेगी। उदयतिथि के हिसाब से देखें तो १० सितंबर को चतुर्दशी तिथि मिलती है, लेकिन उस दिन निशिता मुहूर्त के वक्त अमावस्या लग जाती है। शिवरात्रि के लिए चतुर्दशी तिथि में निशिता मुहूर्त का होना जरूरी माना जाता है, और यह शर्त ९ सितंबर को पूरी हो रही है। इसी वजह से शास्त्र के हिसाब से भाद्रपद महीने की शिवरात्रि बुधवार, ९ सितंबर को ही मनाई जाएगी।
९ सितंबर को पड़ने वाली इस मासिक शिवरात्रि पर निशिता पूजा का शुभ मुहूर्त रात ११:५५ से लेकर आधी रात १२:४१ बजे तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह ४:३१ से ५:१७ बजे तक है, जबकि बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं बन रहा। उस दिन अमृत काल दोपहर १:४३ से ३:१४ बजे तक रहेगा और विजय मुहूर्त दोपहर २:२३ से ३:१३ बजे तक रहेगा। जो लोग सितंबर की शिवरात्रि का व्रत रखते हैं, वे ब्रह्म मुहूर्त में नहाकर उपवास और पूजा का संकल्प लें और उसके बाद भगवान शिव को जल चढ़ाकर पूजा करें।
इस बार शिवरात्रि पर शिवयोग और सिद्धयोग, दोनों शुभ योग बन रहे हैं। शिवयोग सुबह से रात ९:५२ बजे तक रहेगा, जो कीर्तन, ध्यान, योग और पूजा-पाठ के लिए अच्छा माना जाता है। रात ९:५२ बजे के बाद सिद्धयोग शुरू होगा, जिसमें किए गए काम सफल होते हैं। इस दिन आश्लेषा नक्षत्र सुबह से दोपहर ३:१४ बजे तक रहेगा, उसके बाद मघा नक्षत्र लग जाएगा।
शिवरात्रि वाले दिन भद्रा काल दोपहर १२:३० बजे शुरू होकर रात ११:२९ बजे तक चलेगा। यह भद्रा धरती पर रहती है, इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ काम करने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें रुकावट आने की आशंका रहती है। हालांकि इस दौरान शिव की पूजा करने में कोई दिक्कत नहीं है।
मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित मानी जाती है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और शिवलिंग पर पानी, दूध, बेलपत्र और फूल चढ़ाकर पूजा करते हैं। साथ ही शिव के मंत्रों का जाप और शिवचालीसा का पाठ भी करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और सही विधि से शिव की पूजा करने पर मन को शांति मिलती है और भक्तों को शिव का आशीर्वाद मिलता है। रात के वक्त शिव की पूजा करना खासतौर पर अहम माना जाता है।
शिव की पूजा में पानी, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा, चंदन, धूप और दीपक का इस्तेमाल किया जा सकता है। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के हिसाब से पूजा का सामान चढ़ाएं। शिवलिंग पर कोई भी चीज चढ़ाने से पहले अपने आसपास के मंदिर की परंपरा का भी ध्यान रखना ठीक रहता है।