गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:28 IST

माजी मंत्री मदन बाफना के निधन पर शरद पवार भावुक, 60 साल के साथी को खोने का दुख

माजी मंत्री मदन बाफना के निधन पर शरद पवार भावुक, 60 साल के साथी को खोने का दुख
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

वरिष्ठ नेता और माजी मंत्री एडवोकेट मदन बाफना के निधन से महाराष्ट्र के राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में शोक की लहर दौड़ गई है। अपने लंबे राजनीतिक करियर में काम और आम लोगों से जुड़ाव के दम पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले बाफना के जाने पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने गहरा दुख जताया।

"मैंने अपना 60 साल का निष्ठावान साथी और विश्वासू सहयोगी खो दिया है," इन शब्दों में शरद पवार ने बाफना के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए पुरानी यादों को ताजा किया। पवार के बयान से साफ हुआ कि राजनीति से हटकर भी दोनों के बीच दोस्ती और भरोसे का रिश्ता था।

मदन बाफना ने अपने सार्वजनिक जीवन के केंद्र में हमेशा आम नागरिकों को रखा। जमीनी स्तर पर लोगों की दिक्कतें समझना, उन्हें सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाना और प्रशासन के जरिए जनता के सवालों को हल करवाना, इसके लिए वे लगातार कोशिश करते रहे। उनका मानना था कि राजनीति सिर्फ सत्ता पाने का जरिया नहीं बल्कि जनसेवा का एक कारगर माध्यम है, और इसी सोच के साथ उन्होंने अपना सफर तय किया।

मदन बाफना इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने पुणे आए थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात शरद पवार से हुई थी। आगे चलकर यह पहचान दोस्ती और भरोसे के रिश्ते में बदल गई। राजनीति में दोनों अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हुए आगे बढ़ते रहे, लेकिन आपसी विश्वास और स्नेह हमेशा कायम रहा। शरद पवार ने बताया, "मदन शेठ हम सबके साथ मजबूती से खड़े रहे। सालों तक हमारा साथ रहा। सार्वजनिक जीवन के कई मौके हमने साथ देखे। उनके आखिरी दिनों तक हमारा साथ बना रहा।"

मदन बाफना की राजनीतिक पहचान सिर्फ पदों तक सीमित नहीं थी। मंत्री पद समेत कई राजनीतिक जिम्मेदारियां संभालते हुए उन्होंने प्रशासन के अनुभव का इस्तेमाल जनता के सवालों के लिए किया। ग्रामीण इलाकों के नागरिक, किसान, छात्र और आम परिवारों के मुद्दों में उनकी खास दिलचस्पी थी। जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क उनकी कार्यशैली का एक और अहम पहलू था। किसी भी कार्यकर्ता या आम नागरिक से आसानी से मिल सकें और उनकी बात सुन सकें, इसके लिए वे हमेशा कोशिश करते रहते थे। इसी वजह से उनके निधन पर कार्यकर्ताओं और उनके चाहने वालों में गहरा दुख देखा जा रहा है।

राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बावजूद बाफना ने अपनी सादगी और इंसानियत बनाए रखी। शरद पवार समेत कई साथियों के लिए वे सिर्फ राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि करीबी दोस्त और भरोसेमंद साथी थे। लंबे सार्वजनिक जीवन में कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव आए, लेकिन बाफना ने अपने विचारों और जनसेवा की भूमिका के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखी।

मदन बाफना के निधन से मावळ समेत पुणे जिले के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में बड़ा खालीपन आ गया है। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन के योगदान और आम जनता से उनके रिश्ते की याद आने वाले कई सालों तक बनी रहेगी। "निष्ठावान सहयोगी, भरोसेमंद दोस्त और जनता के लिए जिंदगीभर काम करने वाला एक साथी आज हमारे बीच नहीं है," इस भावना के साथ शरद पवार ने बाफना को श्रद्धांजलि दी। मदन बाफना के निधन से एक लंबे राजनीतिक दौर का अंत हुआ है, लेकिन उनके काम की छाप महाराष्ट्र के सार्वजनिक जीवन में हमेशा बनी रहेगी।

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