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02:39 IST

किसान मोर्चा गांव गांव तक पहुंचे, किसानों की समस्या हल करे: सुधीर मुनगंटीवार

चंद्रपुर में जिला स्तरीय किसान मोर्चा मेले में विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने संगठन को गांव-गांव तक पहुंचने और चंद्रपुर में खेती कार्यशाला आयोजित करने की सूचना दी।

किसान मोर्चा गांव गांव तक पहुंचे, किसानों की समस्या हल करे: सुधीर मुनगंटीवार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

किसान के पसीने से ही देश की भूख मिटती है और उसकी मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था खड़ी होती है। इसलिए किसान सिर्फ खेती करने वाला आदमी नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ और राष्ट्र की तरक्की का असली आधार है। इस अन्नदाता की समस्याओं को सिर्फ योजनाओं और आंकड़ों के चश्मे से नहीं देखा जा सकता, उसके खेत तक जाकर उसका दर्द समझना पड़ेगा। किसान मोर्चा को गांव-गांव, खेत की मेड़ तक और आखिरी किसान तक पहुंचकर उसकी आवाज बनना चाहिए। किसान की समस्या को अपनी समस्या मानकर उसे सरकार तक ताकत से पहुंचाना और उसे न्याय दिलाना, यही किसान मोर्चा की असली जिम्मेदारी है, यह बात राज्य के पूर्व वित्त मंत्री विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कही।

भारतीय जनता पार्टी चंद्रपुर (ग्रामीण) जिले की ओर से डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी वाचनालय, चंद्रपुर में जिला स्तरीय किसान मोर्चा सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस मौके पर विधायक देवराव भोंगळे, किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्णजी वेताळ, संयोजक तथा अग्रीक्रॉस प्रमुख रवी निगुडे, किसान मोर्चा के महामंत्री संतोष देशमुख, रंगनाथ सोलंकी, विजय पिदुरकर, रवी चहारे, कृषि मूल्य आयोग के सदस्य बंडू गौरकार, देवानंद महाजन, प्रमोद कडस्कर, अनिल मोरे के साथ ही जिले के किसान मोर्चा के तालुका अध्यक्ष और पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

इस सम्मेलन में विधायक मुनगंटीवार ने किसानों की समस्याओं को लेकर किसान मोर्चा की आगे की भूमिका, संगठन निर्माण और किसानों तक सरकार की योजनाएं पहुंचाने को लेकर विस्तार से मार्गदर्शन किया। सबसे पहले उन्होंने मौजूद किसान भाइयों को बैलपोळा की शुभकामनाएं दीं। साथ ही आने वाले गणेशोत्सव की बधाई देते हुए "किसान भाइयों पर कोई संकट या विघ्न न आए," ऐसी प्रार्थना सुखकर्ता-विघ्नहर्ता श्री गणेश के चरणों में की।

मुनगंटीवार ने कहा कि हम सबके लिए 'जय जवान, जय किसान' सिर्फ नारा नहीं है। जिस पेशे पर देश के पालन-पोषण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, उस खेती के व्यवसाय और किसान को केंद्र में रखना हमारी जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र में खेती के व्यापक महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में 1 करोड़ 71 लाख सातबारा धारक हैं। खेती पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी निर्भर है। इसलिए खेती सिर्फ एक व्यवसाय नहीं बल्कि समाज के आर्थिक जीवन की रीढ़ है, ऐसा उन्होंने साफ किया।

उन्होंने कहा कि जो मां की सेवा करता है उसे सुपुत्र कहते हैं, तो जो मिट्टी की सेवा करता है उसे किसान कहते हैं। मनुष्य का जीवन बदल देने वाली दुनिया की एक अहम खोज है हल। हल की खोज के बाद इंसान एक जगह बसा और खेती पहला व्यवसाय बना। लेकिन आज तरक्की की इस दौड़ में खेती आखिरी व्यवसाय बनती जा रही है, इस पर उन्होंने अफसोस जताया। 'उत्तम खेती, मध्यम व्यापार, कनिष्ठ नौकरी' इस पुरानी कहावत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कभी खेती को सबसे ऊंचा दर्जा मिलता था, मगर आज हालात उल्टे हो गए हैं। किसान मेहनत करता है, पर उसकी संगठित ताकत बढ़ाने की जरूरत है। "किसानों को किस्मत को दोष देकर चुप बैठने के बजाय संगठित होकर अपनी समस्याओं के लिए आवाज उठानी चाहिए," ऐसा मुनगंटीवार ने कहा।

योजनाएं तो पहुंचीं, पर किसान संतुष्ट है क्या, यह सवाल उठाते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि किसान मोर्चा के जरिए किसानों का नेतृत्व करना है तो संगठन का निर्माण सही तरीके से होना चाहिए। चंद्रपुर जिले के आखिरी गांव तक किसान मोर्चा का संगठन पहुंचना चाहिए। किसानों के लिए सरकार की कई योजनाएं हैं, पर वे योजनाएं असल में किसान तक पहुंचाने में हम कितने कामयाब हुए, इस पर मंथन जरूरी है। योजना किसान तक पहुंचने के बाद वह वाकई संतुष्ट हुआ है या नहीं, उसकी दिक्कतें दूर हुई हैं या नहीं, इसका भी मूल्यांकन होना चाहिए, ऐसा मुनगंटीवार ने कहा। योजनाओं का लाभ मिलने में होने वाली देरी पर भी उन्होंने ध्यान खींचा। "किसानों के योजनाओं तक पहुंचने के रास्ते में कई टोल लगे हैं। उन टोल की वजह से उसके मन में खुशी से ज्यादा नफरत पैदा होती है। सब्सिडी पर ट्रैक्टर लिया, पर सब्सिडी कई साल बाद मिली, तो उस योजना का मकसद ही कमजोर पड़ जाता है," ऐसा कहते हुए उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ आसान, पारदर्शी और समय पर मिलना जरूरी है।

किसानों के अलग-अलग सवालों पर किसान मोर्चा को सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि किसानों की कर्जमुक्ति का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया है और धान के बोनस के लिए भी लगातार जोर दिया गया है। धान का किसान गरीब किसान है, इसलिए किसान को न्याय दिलाने की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का स्वाभिमान जगाने वाला कोई है तो वह किसान है, इसलिए किसानों का संगठन मजबूत होना चाहिए और साथ ही वैचारिक मंच भी मजबूत होना चाहिए।

किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्णजी वेताळ महाराष्ट्र के कोने-कोने में दौरा शुरू करें, ऐसी उम्मीद जताते हुए मुनगंटीवार ने चंद्रपुर में किसान मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक आयोजित करने की सूचना दी। साथ ही दो दिन की किसान कार्यशाला लेकर खेती से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर गहरी चर्चा करने की अपील की। चंद्रपुर में होने वाली प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में खेती का व्यवसाय आगे बढ़ाने के लिए अध्ययनपूर्ण प्रस्ताव तैयार करें, यह प्रस्ताव किसान, कृषि विभाग और कृषि मंत्रालय के लिए दिशादर्शक बनना चाहिए, ऐसा उन्होंने कहा। किसानों की समस्याएं सिर्फ कागज पर या बैठक में नहीं, बल्कि गांव-गांव जाकर किसानों से सीधे बात करके, उनकी दिक्कतें जानकर सरकार तक पहुंचाने की अपील उन्होंने की।

भारतीय जनता पार्टी के किसान आंदोलन के इतिहास का हवाला देते हुए मुनगंटीवार ने लोकनेते गोपीनाथजी मुंडे के नेतृत्व की याद दिलाई। 36 साल की उम्र में लोकनेते स्व. गोपीनाथजी मुंडे महाराष्ट्र के प्रदेशाध्यक्ष बने थे। आगे बढ़ना है तो किसानों को अपनी पार्टी अपनी लगनी चाहिए, इसी भावना से उनके नेतृत्व में 1986 में भारतीय जनता पार्टी की पहली संघर्ष किसान यात्रा चंद्रपुर के काळाराम मंदिर से शुरू हुई थी, ऐसा मुनगंटीवार ने बताया। चंद्रपुर की धरती को किसान आंदोलन और संगठनात्मक संघर्ष की परंपरा मिली है, यह बताते हुए इसी धरती से आज के दौर के किसानों के सवालों को नई दिशा देने वाला काम किसान मोर्चा खड़ा करे, ऐसी अपील उन्होंने की।

"हम रहें या ना रहें, भारत यह रहना चाहिए," इस भावना से किसानों में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है, यह कहते हुए विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने किसान मोर्चा से संवेदनशीलता, अध्ययन, संगठन और प्रत्यक्ष कार्य इन चारों बातों को केंद्र में रखकर किसानों के लिए काम करने की अपील की।

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