करिअर और रिश्तों में परफेक्शन की भागदौड़ मानसिक सेहत पर डाल सकती है भारी असर
डॉक्टरों के मुताबिक लगातार कुछ साबित करने का दबाव चिंता, थकान और कॉन्फिडेंस की कमी जैसी दिक्कतों को जन्म दे सकता है
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आज की तेज रफ्तार और कॉम्पिटिटिव दुनिया में सक्सेस को अक्सर करिअर में तरक्की, पैसों की स्टेबिलिटी, सोशल स्टेटस और पर्सनल लाइफ के मील के पत्थरों से नापा जाता है। महत्वाकांक्षा इंसान को आगे बढ़ने और खुद को बेहतर बनाने के लिए मोटिवेट कर सकती है, लेकिन जब करिअर, रिश्तों और निजी जिंदगी में लगातार कामयाब होते रहने का प्रेशर बना रहे, तो इसका असर धीरे-धीरे मेंटल हेल्थ पर पड़ने लगता है। इस बारे में रूबी हॉल क्लिनिक में साइकियाट्री और मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट के हेड डॉ. हमजा हुसैन ने विस्तार से बताया है।
करिअर से जुड़ी उम्मीदें अक्सर बड़े तनाव की वजह बन जाती हैं। नाकामी का डर, नौकरी को लेकर असुरक्षा, वर्कप्लेस पर कॉम्पिटिशन और खुद को बार-बार साबित करने की जरूरत लंबे समय तक स्ट्रेस पैदा कर सकते हैं। कई बार लोग अपनी प्रोफेशनल कामयाबी को ही अपनी वैल्यू से जोड़ने लगते हैं, जिससे काम में आई कोई छोटी सी अड़चन या असफलता भी पर्सनल फेलियर जैसी महसूस होने लगती है। समय के साथ इसका नतीजा चिंता, मेंटल थकान, आत्मविश्वास की कमी और इमोशनल एग्जॉशन जैसी दिक्कतों के रूप में सामने आ सकता है।
रिश्तों में भी उम्मीदों का दबाव महसूस होता है। पार्टनर ढूंढना, शादी करना, "परफेक्ट" रिश्ता निभाना या परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरना, ऐसी कई बातें समाज की तरफ से तय की गई अपेक्षाओं के रूप में सामने आती हैं। सोशल मीडिया इस दबाव को और बढ़ा देता है। दूसरों की खुशहाल रिलेशनशिप, सफल करिअर और सुखी जिंदगी दिखाने वाली चुनी हुई पोस्ट देखकर लोग खुद की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। इस तुलना से हीन भावना, अकेलापन और उम्मीदें टूटने जैसी फीलिंग पैदा हो सकती है।
पर्सनल लाइफ की उम्मीदें भी मेंटल स्ट्रेस को बढ़ा सकती हैं। अपनी पर्सनैलिटी, लुक्स, हेल्थ, फाइनेंशियल कंडीशन, दोस्ती के रिश्ते और लाइफस्टाइल का सही ढंग से खयाल रखते हुए काम और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश बहुत से लोग करते हैं। "जिंदगी की हर चीज व्यवस्थित और प्लान के मुताबिक ही होनी चाहिए" - इस सोच की वजह से गलतियां, अनिश्चितता या मुश्किल वक्त को स्वीकार करना कठिन हो जाता है।
जब आराम करने, नाकामी को मानने या अपनी फीलिंग्स जाहिर करने की गुंजाइश ही नहीं बचती, तो यह दबाव मेंटल हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बहुत सारे लोग अपनी भावनाओं को दबा कर रखते हैं, मदद मांगने से बचते हैं और मानसिक रूप से परेशान होने के बावजूद अपनी रोजमर्रा की जिंदगी चलाते रहते हैं। लंबे समय तक ऐसा स्ट्रेस बना रहे, तो नींद, ध्यान लगाने की क्षमता, रिश्तों और शारीरिक सेहत पर भी असर पड़ सकता है। कई बार लंबे समय तक चलने वाला इमोशनल स्ट्रेस ज्यादा गंभीर मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स में बदल सकता है।
इसीलिए यह समझना जरूरी है कि सक्सेस कोई एक फिक्स गोल या हर किसी के लिए एक जैसी कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। हर इंसान की परिस्थिति, प्राथमिकताएं और जिंदगी का सफर अलग होता है। खुद के लिए आराम का वक्त निकालना, रियलिस्टिक उम्मीदें रखना और अपने करीबी व मतलब भरे रिश्तों को संभाल कर रखना, जिंदगी में एक ज्यादा हेल्दी बैलेंस ला सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि जब स्ट्रेस या इमोशनल दिक्कतें झेलनी मुश्किल लगने लगें, तो एक्सपर्ट की मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी मेंटल हेल्थ का ख्याल रखने का एक पॉजिटिव कदम है। आखिरकार, एक हेल्दी और खुशहाल जिंदगी को सिर्फ इस बात से नहीं नापा जाना चाहिए कि किसी इंसान ने कितना कुछ हासिल किया है, बल्कि इस बात को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए कि वह कितने सुरक्षित, मायने रखने वाले और मानसिक सुकून से भरे तरीके से जी रहा है।