होम लोन लेते वक्त फिक्स्ड, फ्लोटिंग या हाइब्रिड में से किसका चुनाव फायदे का, जानें पूरा हिसाब
अपना घर खरीदने के लिए बैंक जाते ही सामने आते हैं तीन विकल्प, सही चुनाव न होने पर लाखों रुपये का ज्यादा ब्याज भरना पड़ सकता है
अपने घर का सपना हर किसी का होता है, लेकिन इसे पूरा करने में सबसे बड़ी चुनौती यही आती है कि होम लोन किस तरह का लिया जाए। जब भी कोई होम लोन के लिए बैंक जाता है तो सामने तीन मुख्य विकल्प रखे जाते हैं - फिक्स्ड, फ्लोटिंग और हाइब्रिड ब्याज दर वाला लोन। इनमें से सही विकल्प न चुना जाए तो आगे चलकर इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है और लाखों रुपये का अतिरिक्त ब्याज तक भरना पड़ सकता है। इसलिए इन तीनों में फर्क क्या है और अपनी आर्थिक हालत के हिसाब से कौन सा लोन सही रहेगा, यह समझना जरूरी है।
पहला विकल्प है फिक्स्ड होम लोन। जैसा नाम से ही पता चलता है, इसमें पूरे लोन की अवधि के दौरान ब्याज दर एक जैसी बनी रहती है। बाजार में ब्याज दरें ऊपर-नीचे होती रहें, इसका असर EMI पर नहीं पड़ता। इसका फायदा यह है कि पहले दिन से ही पता चल जाता है कि हर महीने कितनी EMI कटेगी, जिससे घर का बजट बनाना आसान हो जाता है। आगे चलकर ब्याज दरें तेजी से बढ़ जाएं तो भी इससे पूरी तरह बचाव मिल जाता है। लेकिन आजकल बैंक पूरी तरह फिक्स्ड रेट पर होम लोन देना पसंद नहीं करते, क्योंकि वे बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए फ्लोटिंग रेट को ही तरजीह देते हैं।
दूसरा विकल्प है फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट होम लोन, जिसे भारत में ज्यादातर घर खरीदने वाले लोग चुनते हैं। इसमें ब्याज दर फिक्स नहीं होती बल्कि बाजार की स्थिति और RBI के रेपो रेट पर निर्भर करती है। इसका फायदा यह है कि शुरुआत में यह फिक्स्ड रेट लोन से काफी सस्ता पड़ता है। सबसे बड़ी बात यह है कि RBI के नियमों के मुताबिक फ्लोटिंग रेट होम लोन पर कोई प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर पेनल्टी नहीं लगती। मगर इसमें अनिश्चितता बनी रहती है - अगर महंगाई बढ़े और RBI लगातार रेपो रेट बढ़ाता रहे तो EMI का बोझ भी बढ़ सकता है और लोन की अवधि भी लंबी हो सकती है।
तीसरा विकल्प हाइब्रिड होम लोन है, जो फिक्स्ड और फ्लोटिंग दोनों रेट का मिश्रण है। लोन शुरू होने पर करीब 3 से 5 साल तक ब्याज दर फिक्स रहती है। यह तय अवधि खत्म होने के बाद लोन अपने आप फ्लोटिंग रेट में बदल जाता है। जिन लोगों को नया घर खरीदते वक्त बड़ा खर्च करना पड़ता है और जो शुरुआती कुछ सालों में EMI में किसी तरह का जोखिम या बदलाव नहीं चाहते, उनके लिए यह अच्छा विकल्प माना जाता है। लेकिन तय अवधि खत्म होने पर जब EMI फ्लोटिंग हो जाती है, तब EMI अचानक काफी ज्यादा बढ़ सकती है।
अब सवाल यह है कि किसके लिए कौन सा विकल्प सही रहेगा। फ्लोटिंग रेट होम लोन उनके लिए बेहतर है जिन्हें शुरुआत में कम ब्याज दर चाहिए और जो आगे चलकर बोनस या बचत से लोन जल्दी चुकाने की योजना बना रहे हैं। लंबी अवधि के लिए यह सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। वहीं फिक्स्ड होम लोन उनके लिए ठीक है जिन्हें लगता है कि अभी ब्याज दरें सबसे नीचे हैं और आगे इनके बढ़ने की ही संभावना है, और जो अपनी EMI में कोई अप्रत्याशित बदलाव नहीं चाहते। अगर सिर्फ पहले 3-5 साल के लिए सुरक्षित और तय EMI चाहिए और बाद में बाजार के उतार-चढ़ाव यानी फ्लोटिंग का जोखिम उठाने को तैयार हैं, तो हाइब्रिड रेट चुना जा सकता है।