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01:06 IST

हिमाचल के नामी बोर्डिंग स्कूल में नौवीं के छात्र की पिटाई, पांच सीनियर स्टूडेंट्स पर केस दर्ज

डीपीएस डगशाई हॉस्टेल में रैगिंग का मामला सामने आया, परिवार की शिकायत पर पुलिस ने पांच सीनियर छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।

हिमाचल के नामी बोर्डिंग स्कूल में नौवीं के छात्र की पिटाई, पांच सीनियर स्टूडेंट्स पर केस दर्ज तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में डीपीएस डगशाई नाम के एक जाने-माने बोर्डिंग स्कूल से रैगिंग और मारपीट का मामला सामने आया है। यहां नौवीं क्लास के एक स्टूडेंट को हॉस्टेल के कमरे से जबरदस्ती खींचकर बाहर लाया गया और उसकी पिटाई कर दी गई। परिवार वालों की शिकायत पर पुलिस ने पांच सीनियर स्टूडेंट्स के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक यह घटना 5 सितंबर को हुई थी। कुछ सीनियर स्टूडेंट्स ने नौवीं के लड़के को उसके हॉस्टेल रूम से जबरदस्ती बाहर निकाला और उसे मारा-पीटा। यह बात परिवार तक पहुंचने के बाद उन्होंने पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने केस बना दिया।

छात्र और शिकायत में किए गए दावों के अनुसार यह कोई एक दिन की बात नहीं थी। स्टूडेंट का कहना है कि पिछले करीब चार महीने से सीनियर स्टूडेंट्स उसे और दूसरे जूनियर स्टूडेंट्स को परेशान करते आ रहे थे। इसमें रैगिंग, गाली-गलौज और शारीरिक प्रताड़ना जैसी बातें शामिल हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि लगातार होने वाली इस प्रताड़ना की वजह से स्टूडेंट मानसिक तनाव में रहने लगा था। जूनियर स्टूडेंट्स सीनियर के डर के माहौल में जी रहे थे। अगर जांच में ये आरोप सही निकलते हैं तो यह मामला सिर्फ रैगिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बोर्डिंग स्कूलों में रहने वाले बच्चों की सेफ्टी और मेंटल हेल्थ को लेकर भी बड़े सवाल खड़े होंगे।

शिकायत मिलने के बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने पांच सीनियर स्टूडेंट्स के खिलाफ केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह देखेगी कि उस दिन क्या हुआ था, कथित मारपीट कैसे हुई, पिछले महीनों में क्या-क्या घटनाएं हुईं और इसमें किन-किन स्टूडेंट्स का रोल था।

इस घटना के बाद बोर्डिंग स्कूल के हॉस्टेल में स्टूडेंट्स की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अगर शिकायत में बताए गए चार महीने की प्रताड़ना के आरोप जांच में साबित होते हैं, तो यह भी देखा जाएगा कि इस दौरान हॉस्टेल वार्डन, टीचर्स या स्कूल मैनेजमेंट तक कोई शिकायत या इशारा पहुंचा था या नहीं।

स्कूलों में रैगिंग और किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना को मामूली अनुशासनहीनता समझ लेना बड़ी दिक्कत खड़ी कर सकता है। खासकर बोर्डिंग स्कूल में जहां बच्चे लंबे समय तक कैंपस और हॉस्टेल में ही रहते हैं, वहां उनकी सेफ्टी के लिए ठीक शिकायत सिस्टम, नियमित निगरानी और भरोसेमंद रिपोर्टिंग का इंतजाम होना जरूरी है।

फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे में जब तक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के नतीजे सामने नहीं आते, तब तक किसी भी स्टूडेंट को दोषी मान लेना ठीक नहीं होगा। पुलिस जांच के बाद स्कूल प्रशासन का रुख और आगे क्या कार्रवाई होती है, यह भी अहम रहेगा। हॉस्टेल में रहने वाले बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के लिए वहां की निगरानी और शिकायत व्यवस्था कितनी असरदार थी, यही सबसे बड़ा सवाल है।

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