गोंदिया के सडक अर्जुनी में 20 गांवों में जल संवर्धन और जलवायु अनुकूल खेती की पहल
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर गोंदिया जिले के सडक अर्जुनी तालुका के 20 गांवों में परिवर्तन-विदर्भ वॉटर स्टुअर्डशिप प्रोजेक्ट शुरू हुआ है, जिसमें जल संवर्धन के साथ जलवायु अनुकूल खेती पर जोर दिया जा रहा है।
गोंदिया जिले के सडक अर्जुनी तालुका के 20 गांवों में एचडीएफसी बैंक परिवर्तन-विदर्भ वॉटर स्टुअर्डशिप प्रोजेक्ट (VWSP) लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दूरदृष्टि से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में जल संवर्धन, जलवायु अनुकूल खेती, गांव स्तर की संस्थाओं को मजबूत बनाने और टिकाऊ आजीविका के विकास पर खास ध्यान दिया जा रहा है। वॉटरशेड ऑर्गनाइजेशन ट्रस्ट (WOTR) के माध्यम से मई 2026 से इस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।
इस प्रोजेक्ट को लेकर हाल ही में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया गया है। यह पहल विदर्भ के 7 जिलों, 9 ब्लॉक और 535 गांवों में चलाई जा रही है। इनमें से 185 गांवों में एचडीएफसी बैंक परिवर्तन के जरिए काम होगा, जबकि 350 गांवों में PoCRA के माध्यम से अलग-अलग गतिविधियां चलाई जाएंगी। इस प्रोजेक्ट का मकसद प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जलवायु अनुकूल खेती, जल संवर्धन और टिकाऊ ग्रामीण विकास के जरिए पूरे विदर्भ के विकास को गति देना है। समझौता ज्ञापन के मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस पहल से विदर्भ की तस्वीर बदलने में जरूर मदद मिलेगी।
प्रोजेक्ट के तहत सडक अर्जुनी तालुका के सभी 20 गांवों में ग्राम विकास समितियां (VDCs) बनाई गई हैं, ताकि लोगों की भागीदारी से योजना बनाने और स्थानीय स्तर पर फैसले लेने को बढ़ावा मिले। खरीफ सीजन में किसान शालाओं, कृषि प्रात्यक्षिक और अभ्यास दौरों के जरिए किसानों को जलवायु अनुकूल खेती के तरीके, आधुनिक तकनीक और टिकाऊ खेती की जानकारी दी जा रही है। जरूरतमंद और वंचित परिवारों के लिए बकरी पालन और घर के आंगन में मुर्गी पालन जैसी टिकाऊ आजीविका योजनाओं के लिए लाभार्थियों को चुनने की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें भूमिहीन, विधवा, महिला मुखिया वाले परिवारों और छोटे किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है।
PoCRA फेज-2 के तहत सरकारी तालमेल से इस पहल में 32 गांवों को जोड़ा जा रहा है। गांव स्तर पर 'परिवर्तन भागीदार' नियुक्त कर किसानों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, उनका फायदा दिलाने और संबंधित विभागों से जरूरी तालमेल बिठाने पर जोर दिया जाएगा। दिसंबर 2026 से तालाब नवीनीकरण, नाला गहरा और चौड़ा करने, सीमेंट नाला बांध, नए तालाब और वॉटरशेड डेवलपमेंट के दूसरे कामों को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। इन कामों से पानी का भंडारण बढ़ाने, भूजल रीचार्ज को बढ़ावा देने, खेती की पैदावार बढ़ाने और गांवों की जलवायु बदलाव से निपटने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस प्रोजेक्ट का काम व्रोट के डायरेक्टर प्रकाश केसकर, रीजनल मैनेजर शरद भनगडे और सडक अर्जुनी के प्रोजेक्ट मैनेजर राहुल पंचभाई देख रहे हैं।