गोकुळ की 492 दूध संस्थाओं के मतदान अधिकार पर फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, चुनाव से पहले हलचल
कोल्हापुर के गोकुळ दूध संघ के चुनाव से ठीक पहले 492 अवसायन में गई संस्थाओं को मतदान का हक देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी तरफ पहले से पात्र 1400 संस्थाओं ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ यानी गोकुळ के पंचवार्षिक चुनाव की सरगर्मी अभी बढ़ ही रही थी कि एक नया कोर्ट केस सामने आ गया है। अवसायन यानी लिक्विडेशन में गई 492 दूध संस्थाओं को पात्र मानकर आखिरी मतदाता सूची में शामिल करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इससे इन 492 संस्थाओं का मतदान अधिकार एक बार फिर कोर्ट के फैसले पर टिक गया है।
इस्पुर्ली, तालुका करवीर की श्रीराम दूध संस्था के सदस्य रजनीकांत चेंडके ने महाराष्ट्र सरकार और सहकार विभाग के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन यानी SLP दाखिल की है। खास बात यह है कि 15 सितंबर से उम्मीदवारी फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी, ठीक उसी वक्त यह पिटीशन दाखिल हुई है, जिससे गोकुळ की राजनीति में हलचल मच गई है।
इस पिटीशन पर मंगलवार को सुनवाई की तारीख मिलने की उम्मीद है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है, इस पर सबकी नजर टिकी है।
इस बीच 492 पात्र दूध संस्थाओं का मतदान अधिकार बना रहे, इसके लिए विधायक सतेज पाटील ने इन संस्थाओं के पक्ष में पहल की है। सुप्रीम कोर्ट में इन संस्थाओं की तरफ से पैरवी एडवोकेट आनंद लांडगे करेंगे।
पिछले छह महीने से गोकुळ का चुनाव अलग-अलग कोर्ट केस की वजह से टलता रहा है। अब जब चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है और फॉर्म भरने का वक्त सिर पर आ गया है, तभी 492 संस्थाओं का मुद्दा फिर कोर्ट में पहुंच गया है। इससे चुनाव के गणित पर क्या असर पड़ेगा, इसकी चर्चा शुरू हो गई है।
दूसरी तरफ गोकुळ के चुनाव में पहले से पात्र मानी गईं करीब 1400 दूध संस्थाओं ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। पिछले छह महीनों में कोर्ट की प्रक्रिया के बाद इन संस्थाओं को मतदान का अधिकार मिला था।
दो दिन पहले इन पात्र संस्थाओं ने 'सत्यविजय कृतज्ञता समारोह' नाम से एक कार्यक्रम रखा। इसमें चुनाव में संस्थाओं को अपात्र ठहराने की कोशिश करने वाली कथित 'अदृश्य शक्ति' के खिलाफ आवाज उठाई गई।
इस समारोह में इन संस्थाओं ने दावा किया कि उन्होंने आने वाले चुनाव में इस 'अदृश्य शक्ति' को वोट न देने का फैसला एकमत से लिया है। इससे गोकुळ के चुनाव में पात्र संस्थाओं का रुख किस तरफ जाएगा, इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में चल रही पिटीशन और दूसरी तरफ पात्र संस्थाओं का आक्रामक रुख, इन दोनों की वजह से गोकुळ का चुनाव अब और दिलचस्प होता दिख रहा है।