गडचांदूर: सिमेंट कंपनी की जमीन मुआवजा राशि में आदिवासियों से 82 लाख की ठगी, दो पर केस दर्ज
कोरपना कोर्ट के आदेश पर गडचांदूर पुलिस ने दो दलालों के खिलाफ धोखाधड़ी और जबरन वसूली का मामला दर्ज किया है।
चंद्रपुर जिले के गडचांदूर में एक सिमेंट कंपनी से मिली जमीन के मुआवजे में से बीस फीसदी हिस्सा मांगकर आदिवासी किसानों से करीब 82 लाख 66 हजार रुपये ऐंठ लेने का मामला सामने आया है। कोरपना कोर्ट के आदेश के बाद गडचांदूर पुलिस ने भरत कवडुजी आत्राम और आनंदराव मारोती मेश्राम नाम के दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
मामले की जड़ 2012 में जाती है, जब वरोरा के रिटायर्ड तलाठी और सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कवडुजी खोब्रागडे जिवती में तलाठी के तौर पर तैनात थे। उस वक्त सूचना के अधिकार में यह बात सामने आई थी कि माणिकगड सिमेंट कंपनी, गडचांदूर, जिवती तालुका के मौजा कुसुंबी में 24 आदिवासियों की करीब 63.62 हेक्टेयर यानी लगभग 157 एकड़ जमीन पर राजस्व चुकाए बिना और पेसा कानून का उल्लंघन करके अवैध रूप से चूना पत्थर निकाल रही थी। इसके खिलाफ खोब्रागडे ने मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में क्रिमिनल रिट पिटीशन दाखिल की थी, जिसमें पीड़ित आदिवासियों ने भी हलफनामे दिए थे।
यह मामला कोर्ट में चल ही रहा था कि आरोपी भरत आत्राम और आनंदराव मेश्राम ने सिमेंट कंपनी से बड़ा मुआवजा दिलाने का लालच देकर गरीब आदिवासी किसानों को बहला-फुसलाकर उनके अंगूठे लगवाए और कंपनी से समझौता करा दिया। किसानों से कहा गया कि उन्हें प्रति एकड़ दस लाख रुपये मिलेंगे, लेकिन असल में कंपनी ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की आवाळपूर शाखा में उनके खातों में सिर्फ चार लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से रकम जमा की।
पैसे खाते में आते ही दोनों आरोपियों ने अपना असली रंग दिखाया और आदिवासियों को मिली पूरी रकम में से बीस फीसदी अपने लिए मांगने लगे। धमकी दी कि अगर यह हिस्सा नहीं दिया गया तो कंपनी के बड़े अफसरों से बात करके करार रद्द करा देंगे, कोर्ट से स्टे ला देंगे और मुआवजे से हमेशा के लिए वंचित कर देंगे। इस डर और दबाव में सारजाबाई कोटनाके, निळकंठ आत्राम, आयु सिडाम, बापूराव जुमनाके, वासुदेव जुमनाके, किसन जाधव, नामदेव जाधव, रामू सिडाम, हिरामण उदे समेत तमाम प्रभावित आदिवासी किसानों ने अपने बैंक खातों से लाखों रुपये निकालकर आरोपियों को दे दिए। यहां तक कि सरकार की ओर से कोर्ट के काम के लिए मिले 50-50 हजार रुपये में से भी हिस्सा वसूला गया। एक अगस्त 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच दोनों आरोपियों ने मिलकर आदिवासियों से कुल मिलाकर करीब 82 लाख 66 हजार रुपये जबरदस्ती वसूल लिए।
स्थानीय पुलिस से बार-बार शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी, इसलिए विनोद खोब्रागडे ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत कोरपना कोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट के सामने पीड़ित आदिवासियों के हलफनामे और पुख्ता सबूत पेश किए गए। कागजात देखने के बाद कोरपना सिविल कोर्ट जूनियर डिवीजन तथा प्रथम श्रेणी न्यायदंडाधिकारी ने सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
कोर्ट के आदेश के बाद गडचांदूर थाना प्रभारी शिवाजीराव कदम की निगरानी में भरत कवडुजी आत्राम और आनंदराव मारोती मेश्राम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 308(2) (जबरन वसूली), 318(2), 318(4) (धोखाधड़ी) और 3(5) (साझा मकसद) के तहत केस दर्ज किया गया है। इस मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक गणेश अनभुले कर रहे हैं। गरीब और अनपढ़ आदिवासियों के हक के पैसों पर हाथ साफ करने वाली इस टोली पर केस दर्ज होने से इलाके के लोगों में राहत है, और अब सबकी नजर इस पर है कि पुलिस आरोपियों को कब गिरफ्तार करती है।