गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:41 IST

दारू पीने की बात पहले बताई थी, फिर भी क्लेम रिजेक्ट, नागपुर आयोग ने कंपनी को 50 लाख देने का आदेश दिया

नागपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने एडलवाइस टोकियो लाइफ इंश्योरेंस को पॉलिसी होल्डर की मौत के बाद फैमिली को 50 लाख रुपये का क्लेम, 9 फीसदी ब्याज और हर्जाना देने का आदेश दिया है।

दारू पीने की बात पहले बताई थी, फिर भी क्लेम रिजेक्ट, नागपुर आयोग ने कंपनी को 50 लाख देने का आदेश दिया
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

शराब पीने की आदत के बारे में पहले ही बता दिया था, फिर भी पॉलिसी होल्डर की मौत के बाद इंश्योरेंस कंपनी ने 50 लाख रुपये का क्लेम रिजेक्ट कर दिया। कंपनी का कहना था कि पॉलिसी होल्डर ने अपनी ड्रिंकिंग हैबिट के साथ-साथ डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की जानकारी भी छुपाई थी। मामला जब उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा तो कंपनी के अपने ही पेपर्स ने उसकी दलील की हवा निकाल दी। आयोग ने साफ कहा कि पॉलिसी जारी होने से पहले जो आदत बता दी गई थी, उसे बाद में क्लेम रिजेक्ट करने की वजह नहीं बनाया जा सकता। नागपुर डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन ने अब एडलवाइस टोकियो लाइफ इंश्योरेंस को 50 लाख रुपये का क्लेम, 9 परसेंट ब्याज और हर्जाना देने का ऑर्डर दिया है।

यह पूरा मामला एक महिला के पति की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़ा है। पति ने अप्रैल 2021 में यह पॉलिसी ली थी। करीब दो साल बाद, 26 जनवरी 2023 को उनकी अचानक मौत हो गई। इसके बाद पत्नी ने इंश्योरेंस कंपनी में 50 लाख रुपये के क्लेम के लिए अप्लाई किया। लेकिन कंपनी ने क्लेम देने की बजाय पॉलिसी ही कैंसिल कर दी और सितंबर 2023 में उसे 18,713 रुपये का प्रीमियम रिफंड चेक भेज दिया। इसके बाद महिला उपभोक्ता आयोग पहुंची और इंश्योरेंस अमाउंट के साथ मानसिक परेशानी के लिए हर्जाने की मांग की।

सुनवाई के दौरान इंश्योरेंस कंपनी ने दावा किया कि मरने वाले शख्स ने अपनी पुरानी ड्रिंकिंग हैबिट, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी जानकारी कंपनी से छुपाई थी। कंपनी ने इसे इंश्योरेंस कंपनी को पूरी और सही जानकारी देने के नियम का उल्लंघन बताया। लेकिन आयोग के सामने पेश किए गए पेपर्स ने कंपनी की इस दलील को कमजोर कर दिया। आयोग को पता चला कि पॉलिसी जारी होने से पहले 20 मई 2021 को भरे गए मेडिकल चेकअप फॉर्म में मरने वाले शख्स ने खुद बताया था कि वह पिछले 15 साल से महीने में दो बार करीब 90 मिली व्हिस्की पीता था। यानी शराब पीने की बात इंश्योरेंस कंपनी से छुपी नहीं थी। इतना ही नहीं, कंपनी के पैनल डॉक्टर ने पॉलिसी जारी करने से पहले किए गए मेडिकल चेकअप में हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज का जिक्र तक नहीं किया था।

इन बातों के आधार पर आयोग ने कहा कि जब पॉलिसी जारी होने से पहले ही कंपनी के रिकॉर्ड में शराब पीने की जानकारी मौजूद थी, तो उसी आधार पर क्लेम रिजेक्ट करना सही नहीं है। आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को 9 परसेंट सालाना ब्याज के साथ 50 लाख रुपये का क्लेम भरने का आदेश दिया। यह ब्याज 30 सितंबर 2023 से गिना जाएगा। इसके अलावा, महिला को शारीरिक और मानसिक परेशानी के लिए 10,000 रुपये और केस के खर्चे के लिए अलग से 10,000 रुपये देने का भी आदेश दिया गया।

आयोग ने यह भी कहा कि हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज सिर्फ लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां होने की वजह से इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब कंपनी के अपने मेडिकल चेकअप में इनका जिक्र तक नहीं आया हो। ऐसे में अगर किसी के साथ ऐसा कुछ होता है तो सतर्क रहें और सही वक्त पर सही फैसला लें।

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