चंद्रपुर में 400 साल पुराने महाशिवलिंग का जीर्णोद्धार, अमृता फडणवीस रहीं मौजूद
आमदार किशोर जोरगेवार की पहल और खुद के खर्च से बना मंदिर, अमृता फडणवीस ने किया महाअभिषेक
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
चंद्रपुर के लालपेठ-भिवापूर इलाके में मंगलवार को एक बड़ा धार्मिक कार्यक्रम हुआ। महाराष्ट्र के सबसे बड़े पुरातन महाशिवलिंग के जीर्णोद्धार का यह समारोह अमृता देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में संपन्न हुआ। यह शिवलिंग करीब 400 साल से खुले में पड़ा था, अब इसे भव्य मंदिर का छत मिला है।
यह मंदिर आमदार किशोर जोरगेवार की पहल और उनके खुद के खर्च से बनाया गया है। पिछले सावन में उन्होंने इस जीर्णोद्धार का संकल्प लिया था, और इसी साल सावन में यह काम पूरा हुआ। सिर्फ मंदिर ही नहीं, पूरे परिसर का कायापलट कर दिया गया।
समारोह में जिलाधिकारी वसुमना पंत, पुलिस अधीक्षक आयुष्य नोपानी, मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश, वेकोली के मैनेजर संजीवसिंग रेड्डी, मंदिर समिति के अध्यक्ष शंकर बल्लेपवार, सचिव किशोर रायपूरकर, मनपा महापौर संगीता खांडेकर, उपमहापौर प्रशांत दानव समेत कई नेता और अधिकारी मौजूद रहे।
मंदिर हिमाचल प्रदेश और नेपाल की पारंपरिक स्थापत्य शैली से प्रभावित है। जीर्णोद्धार के बाद पहली बार यहां बड़े पैमाने पर धार्मिक विधि हुई। अमृता फडणवीस कावड़ लेकर मंदिर परिसर में पहुंचीं। उनकी मौजूदगी में शिवलिंग पूजन, मंत्रोच्चार के साथ महाअभिषेक, महाआरती और महाकाल श्रृंगार दर्शन का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में शिवभक्त वहां पहुंचे। किशोर जोरगेवार के अनुरोध पर अमृता फडणवीस ने शिवतांडव स्तोत्र भी सुनाया।
किशोर जोरगेवार ने कहा कि यह जमीन सैकड़ों साल पुराना इतिहास समेटे है और करीब 400 साल पुराना यह शिवलिंग बरसों से खुले में पड़ा था, जो उनकी श्रद्धा के हिसाब से सही नहीं था। उन्होंने बताया कि पिछले साल जब अमृता फडणवीस चंद्रपुर आई थीं, तो उन्होंने शिवलिंग देखकर कहा था कि भोलेनाथ का यूं खुले में रहना ठीक नहीं, यहां भव्य मंदिर बनना चाहिए। यही बात उनके संकल्प की वजह बनी।
जोरगेवार ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य चंद्रपुर को धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर लाना है। उन्होंने बताया कि देश के बीचोंबीच बसे चंद्रपुर में यह मंदिर उन भक्तों के लिए है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों का दर्शन नहीं कर पाते। उनके मुताबिक इस परिसर में देवी-देवताओं के वाहनों की मूर्तियां और पुरानी इमारतों के निशान मिलते हैं, जिससे लगता है कि पहले भी यहां मंदिर बनाने का काम शुरू हुआ था पर पूरा नहीं हो सका। जोरगेवार ने यह भी बताया कि मंदिर बनाने के दौरान कई बार रुकावटें आईं और कई सवाल भी उठाए गए, लेकिन काम रुका नहीं क्योंकि यह सिर्फ मंदिर का नहीं बल्कि चंद्रपुर की श्रद्धा और भविष्य का मामला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र में उनकी सुरक्षा को पूरा भरोसा है और जहां धर्म और इंसान दोनों सुरक्षित हैं, वहां चंद्रपुर के इस पुरातन शिवलिंग पर कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
अमृता फडणवीस ने भी मंदिर की तारीफ की। उन्होंने कहा, "पिछले साल मैं यहां आई थी और इस साल फिर आने का मौका मिला। मंदिर का काम रोकने की कोशिशें हुईं, लेकिन ताकत से बड़ी श्रद्धा होती है, इसलिए यह मंदिर यहां खड़ा हो सका। शिवतांडव का मतलब है बदलाव और परिवर्तन। आज कावड़ लेकर यहां आने की मुझे खास खुशी हुई। यहां मौजूद हर चेहरे पर भक्ति का भाव दिख रहा है। ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों से समाज एक साथ आता है। अगर कोई काम श्रद्धा और लगन से किया जाए, तो जहर भी अमृत बन जाता है।"
इस मौके पर अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छा काम करने वालों को सम्मानित भी किया गया, और वहां बन रही दो करोड़ रुपए की इमारत का भूमिपूजन भी हुआ। इस समारोह के बाद लालपेठ-भिवापूर के इस पुरातन शिवस्थान का धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से महत्व और बढ़ गया है।