ब्रिक्स 2026 परिषद पर टाइम्स नाऊ की खास कवरेज, दिल्ली में वैश्विक सत्ता समीकरणों पर चर्चा
18वीं ब्रिक्स शिखर परिषद के लिए भारत तैयार, नई दिल्ली में जुटेंगे दुनियाभर के अर्थशास्त्री और मुत्सद्दी
भारत 18वीं ब्रिक्स (BRICS) शिखर परिषद की मेजबानी के लिए तैयार हो गया है। इसी सिलसिले में 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 'BRICS Dialogues' नाम का खास मंच सजने वाला है, जहां दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में बन रहे नए समीकरणों पर मंथन होगा। ब्रिक्स परिषद को देखते हुए टाइम्स नाऊ (TIMES NOW) चैनल ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और बदलते सत्ता केंद्रों पर विस्तार से कवरेज शुरू कर दी है।
'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' थीम के तहत हो रहे इस आयोजन के मौके पर टाइम्स नाऊ ने दुनियाभर के नामी अर्थशास्त्रियों, मुत्सद्दियों और विचारकों के खास इंटरव्यू दिखाए हैं। इनमें कई अहम राय सामने आई हैं।
फायनान्शियल टाइम्स के स्तंभकार मार्टिन वुल्फ ने कहा कि भारत और चीन जैसी दो उभरती महाशक्तियों के लिए आपस में बातचीत करने का ब्रिक्स एक बहुत जरूरी मंच है। इससे दोनों देशों के बीच का द्विपक्षीय तनाव कम करने में मदद मिलती है। अमेरिका-ईरान तनाव पर बोलते हुए उन्होंने चेताया कि अगर यह संघर्ष इसी तरह चलता रहा तो साल के आखिर तक ईंधन की किल्लत हो सकती है और कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं।
मशहूर अर्थशास्त्री और लेखक डॉ. जेफ्री डी. सैक्स ने कहा कि अमेरिका अब उतार पर जा रही ताकत है, जबकि एशिया दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता केंद्र बन चुका है। भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है और चीन के साथ मजबूत रिश्ते भारत के लिए फायदेमंद साबित होंगे। उनके मुताबिक ब्रिक्स एक बहुध्रुवीय (Multipolar) मंच के रूप में उभर रहा है, जो अमेरिका के दबदबे को चुनौती देता है। AlphaGeo के फाउंडर और सीईओ पराग खन्ना ने कहा कि ब्रिक्स को वैश्विक विवादों में मध्यस्थता करने की बजाय अपने आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) जैसी पहलों के जरिए आपसी व्यापार बढ़ाकर डॉलर पर निर्भरता कम करनी चाहिए।
इस सीरीज के अगले चरण में लोकसभा सांसद मनीष तिवारी और चीन में भारत के पूर्व राजदूत गौतम बंबावाले के खास इंटरव्यू शनिवार, 12 सितंबर को दिखाए जाएंगे। इससे पहले तिब्बत के पूर्व प्रधानमंत्री लोबसांग सांगाय, जी-20 के पूर्व शेरपा अमिताभ कांत और आईटीपीओ के अध्यक्ष जावेद अशरफी समेत कई जानकार ब्रिक्स के विस्तार पर अपनी राय दे चुके हैं।
दुनिया में पुराने गठबंधनों में दरार पड़ रही है और नए सत्ता केंद्र उभर रहे हैं, ऐसे में भारत के सामने आने वाली चुनौतियों और मौकों को समझने का काम टाइम्स नाऊ की अनुभवी पत्रकार और संपादकीय टीम मौके पर मौजूद रहकर कर रही है।