भायखळा से जे.जे. मार्ग फ्लाईओवर का 22 फीसदी काम पूरा, मई 2028 तक डेडलाइन
बृहन्मुंबई महानगरपालिका भायखळा से जे.जे. मार्ग तक नया उड्डाणपुल बना रही है, ताकि मुंबई में ट्रैफिक की आवाजाही आसान हो सके।
मुंबई में ट्रैफिक को स्मूथ और आपस में जोड़ने के मकसद से बृहन्मुंबई महानगरपालिका भायखळा से जे.जे. मार्ग तक एक नया उड्डाणपुल बना रही है। यह काम तेजी से चल रहा है। यह प्रोजेक्ट भायखळा के सीताराम सिलम उड्डाणपुल यानी वाय ब्रिज को जे.जे. उड्डाणपुल यानी कुतुब-ए-कोंकण मखदूम अली माहिमी फ्लाईओवर से जोड़ेगा। इसका निर्माण जे.जे. मार्ग और साबू सिद्दीकी टेक्निकल कॉलेज के जंक्शन पर हो रहा है।
महानगरपालिका ने शहर के कई हिस्सों में उड्डाणपुल का प्लान बनाया है, ताकि पूरे मुंबई में आवाजाही सीमलेस और इंटीग्रेटेड हो सके। इसी सिलसिले में यह फ्लाईओवर कंप्रीहेंसिव मोबिलिटी प्लान के तहत बनाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में मुख्य केबल-स्टे पुल और वायाडक्ट के अलावा पूर्व और पश्चिम दिशा में जुड़ने वाले फ्लाईओवर आर्म्स भी शामिल हैं।
मुख्य केबल-स्टे और वायाडक्ट हिस्से का डिजाइन 2 प्लस 2 लेन का है। केबल-स्टे हिस्से की लंबाई करीब 230 मीटर और वायाडक्ट की लंबाई 312 मीटर रखी गई है। इस हिस्से की चौड़ाई 16.5 मीटर है। बायीं तरफ का अप रैंप 205 मीटर गुणा 5.25 मीटर का होगा, जबकि दायीं तरफ का अप रैंप 213 मीटर गुणा 5.25 मीटर का होगा। इस स्ट्रक्चर को बनाने में आरसीसी और स्ट्रक्चरल स्टेनलेस स्टील टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि फ्लाईओवर मजबूत रहे, टिकाऊ हो और लंबे समय तक इस्तेमाल में आ सके।
मुख्य उड्डाणपुल से जुड़ने के लिए पूर्व और पश्चिम दिशा में फ्लाईओवर आर्म्स भी बनाए जा रहे हैं। ये आर्म्स 1 प्लस 1 लेन के होंगे। पश्चिम दिशा के फ्लाईओवर आर्म की लंबाई करीब 290 मीटर और पूर्व दिशा के आर्म की लंबाई करीब 350 मीटर होगी। दोनों तरफ के फ्लाईओवर आर्म्स की चौड़ाई 8.5 मीटर रखी गई है और इनके निर्माण में भी आरसीसी और स्ट्रक्चरल स्टेनलेस स्टील का ही इस्तेमाल होगा। मुख्य केबल-स्टे पुल, वायाडक्ट और दोनों तरफ के फ्लाईओवर आर्म्स को साथ मिलाकर डिजाइन किया गया है, ताकि अलग-अलग दिशाओं से आने-जाने वाले ट्रैफिक को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके।
इस पुल प्रोजेक्ट के लिए तय समय मानसून को छोड़कर 26 महीने रखा गया है, यानी मई 2028 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। फिलहाल जो काम चल रहा है, उसमें फिजिकल प्रोग्रेस 22 फीसदी हुई है। हालांकि, तय समय से पहले प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए काम की प्लानिंग असरदार तरीके से करनी चाहिए। जरूरी मैनपावर और मशीनरी उपलब्ध रहे और अलग-अलग विभागों के बीच सही तालमेल बना रहे, यह भी जरूरी है। लोगों को होने वाली दिक्कत कम करने के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट और सेफ्टी के उपायों को प्राथमिकता दी जाए, ऐसे निर्देश एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर, प्रोजेक्ट्स, अभिजीत बांगर ने दिए हैं।