भारत और यूएई के बीच 11.5 अरब डॉलर के ओडिशा एल्युमिनियम प्रोजेक्ट पर समझौता
ब्रिक्स समिट के दौरान पीएम मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद की मुलाकात में रक्षा, एआई, स्पेस जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने का फैसला हुआ, साथ ही यूएई की कंपनी आईएचसी ने ओडिशा में 11.5 अरब डॉलर का एल्युमिनियम प्लांट लगाने का ऐलान किया।
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नई दिल्ली में हुई 18वीं ब्रिक्स समिट के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच कई नए और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को लेकर विस्तार से बातचीत हुई। यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद जर्मनी के दौरे पर होने की वजह से शेख खालिद ने ही इस समिट में यूएई की तरफ से नुमाइंदगी की।
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और भू राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में यह बैठक बहुत मायने रखती है। मध्य पूर्व की इस उथल पुथल के बीच पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत और यूएई के रिश्ते इलाके में स्थिरता, समृद्धि और शांति की एक मजबूत मिसाल हैं। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के रिश्ते एक नई रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं और अब दोनों देश इससे भी बड़े आर्थिक लक्ष्य तय कर रहे हैं।
बैठक के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा, फूड सिक्योरिटी और कनेक्टिविटी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अपनी साझेदारी आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसके अलावा स्ट्रैटेजिक एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर, यानी आईएमईसी में कनेक्टिविटी की नई संभावनाओं पर भी गहराई से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इस इकोनॉमिक कॉरिडोर से दोनों देशों के बीच व्यापार और लॉजिस्टिक नेटवर्क को नई दिशा मिलेगी।
इस बैठक का सबसे बड़ा और अहम पहलू रहा यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी, यानी आईएचसी का भारत के ओडिशा राज्य में 11.5 अरब डॉलर, यानी करीब 96 हजार करोड़ रुपये का बड़ा निवेश करने का ऐलान। आईएचसी ग्रुप की कंपनी इंटरनेशनल रिसोर्सेज होल्डिंग और भारत की अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, यानी एईएल के बीच इस इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम प्रोजेक्ट के लिए करार हुआ है। इस जॉइंट वेंचर में आईएचसी और अडानी ग्रुप की 50 50 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी। यह प्रोजेक्ट भारत के एल्युमिनियम सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा सीधा विदेशी निवेश प्रोजेक्ट बनेगा, जिससे ओडिशा दुनियाभर में एल्युमिनियम उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर सकता है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक दोनों नेताओं ने यूएई के नए सॉवरेन इन्वेस्टमेंट फंड 'ल इमाद' की भूमिका पर खास तवज्जो दी। यह फंड भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा जरूरतों और टेक्नोलॉजी के विकास में अहम निवेश कर सकता है। पश्चिम एशिया में जंग के हालात के बीच भारतीय पक्ष ने यूएई की लीडरशिप से वहां रह रहे 40 लाख से ज्यादा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई का भरोसा लिया। साथ ही दोनों देशों में इस बात पर भी सहमति बनी कि भारत को ऊर्जा की सप्लाई बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रहेगी।
इससे पहले जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने भारत का दौरा किया था, जिसके बाद मई में पीएम मोदी ने यूएई का दौरा किया था। इन बार बार होने वाले हाई लेवल दौरों से दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत और भरोसेमंद बने हैं। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान यूएई की सक्रिय भूमिका की भी भारत की तरफ से खूब तारीफ की गई।