गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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22:18 IST

बेरोजगारी पर मुंबई युवा कांग्रेस का सरकार से सवाल, केक काटकर किया विरोध

प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर मुंबई युवा कांग्रेस ने बेरोजगार युवाओं के मुद्दे उठाते हुए सरकार को घेरा।

बेरोजगारी पर मुंबई युवा कांग्रेस का सरकार से सवाल, केक काटकर किया विरोध
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर देशभर में जहां तरह-तरह के कार्यक्रम हो रहे थे, वहीं मुंबई युवा कांग्रेस ने बेरोजगार युवाओं की परेशानियों की तरफ सरकार का ध्यान खींचने के लिए एक अलग ही तरीका अपनाया। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से एक 'डिमांड केक' काटा और 'मेरी डिग्री का क्या?' कहकर सरकार से सवाल पूछा।

इस मुहिम के पीछे मकसद यह था कि जन्मदिन के जश्न के बजाय सरकार बेरोजगार युवाओं के रोजगार से जुड़े सवालों पर ध्यान दे। इसी मौके पर बोलते हुए मुंबई युवा कांग्रेस की अध्यक्षा झीनत शबरीन ने कहा कि आज देश के युवाओं के हाथ में डिग्री तो है, लेकिन नौकरी नहीं है। उन्होंने बताया कि बहुत सारे युवा स्पर्धा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, मगर भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी और नियुक्ति कब मिलेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

शबरीन ने आगे कहा कि सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं, फिर भी भर्ती प्रक्रिया बार-बार लटक जाती है। कभी पेपर लीक हो जाता है, तो कभी परीक्षा के ऐलान से लेकर परीक्षा, रिजल्ट, दस्तावेज सत्यापन और आखिरी नियुक्ति तक पहुंचने में युवाओं को सालों इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि सरकार एक तय और समय-सीमा वाला भर्ती कैलेंडर जारी करे, ताकि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो और भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तथा समयबद्ध तरीके से चले।

शबरीन ने कहा कि 'मेरी डिग्री का क्या?' सिर्फ एक सवाल नहीं है, बल्कि देश के बेरोजगार युवाओं के भविष्य की आवाज है। उन्होंने कहा कि हमारी डिग्रियों का क्या होगा, हमारी नौकरियों का क्या होगा और हमारे भविष्य का क्या होगा, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।

इस मुहिम के तहत ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक रोजगार का यह मुद्दा पहुंचाने के लिए एक अलग एंथम और आधिकारिक वेबसाइट भी शुरू की गई है, जिसका पता www.meridegreekakya.com है। शबरीन ने बताया कि मुंबई युवा कांग्रेस की तरफ से बेरोजगारी, अटकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं और सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों का मुद्दा बड़े पैमाने पर उठाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संघर्ष भी किया जाएगा।

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