गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:42 IST

बांग्लादेश में जुलाई आंदोलन केस में अवामी लीग के 7 बड़े नेताओं को फांसी की सजा, पार्टी ने बताया फर्जी फैसला

बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने ओबैदुल कादर सहित अवामी लीग के सात वरिष्ठ नेताओं को मौत की सजा सुनाई है, पार्टी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए तीखा विरोध जताया है।

बांग्लादेश में जुलाई आंदोलन केस में अवामी लीग के 7 बड़े नेताओं को फांसी की सजा, पार्टी ने बताया फर्जी फैसला
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बांग्लादेश की सियासत में एक बार फिर जबरदस्त उबाल आ गया है। देश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेहद करीबी सात वरिष्ठ नेताओं को फांसी की सख्त सजा सुना दी है। इस फैसले के बाद अवामी लीग पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे पूरी तरह एकतरफा, पक्षपाती और राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के लिए लिया गया फर्जी फैसला करार दिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को शेख हसीना के भरोसेमंद साथी और अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर के साथ-साथ पार्टी और उससे जुड़े संगठनों के छह और वरिष्ठ नेताओं को दोषी करार दिया। ट्रिब्यूनल का कहना है कि जुलाई 2024 में हुए बड़े जनआंदोलन के दौरान हुए मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए यह फांसी की सजा सुनाई गई है। वहीं अवामी लीग ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि मौजूदा अंतरिम सरकार न्यायपालिका को विरोधियों के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है और यह एक तरह की न्यायिक हत्या है।

अवामी लीग ने इस फैसले पर कानूनी और नैतिक दोनों तरह के सवाल खड़े करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है। पार्टी का कहना है कि जिन नेताओं को फांसी की सजा दी गई है, उनमें से कोई भी सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल के सामने मौजूद नहीं था। पार्टी का तर्क है कि इंटरनेशनल क्रिमिनल लॉ के बुनियादी नियमों के तहत आरोपी की गैरमौजूदगी में भी उसे कानूनी सुरक्षा की गारंटी दी जानी चाहिए, जिसमें अपनी पसंद का वकील चुनने का बुनियादी हक भी शामिल है। लेकिन इस केस में इन तमाम वैश्विक नियमों को ताक पर रखकर जल्दबाजी में फैसला थोप दिया गया।

पार्टी के मुताबिक, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स लॉ और इंटरनेशनल क्रिमिनल लॉ के सभी मान्य सिद्धांतों को दरकिनार करके यह पूरा केस गैरकानूनी तरीके से चलाया गया। इससे देश में कानून का राज कायम होने की बजाय राजनीतिक बदले की भावना और अपराधी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिल रहा है। पार्टी का कहना है कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ICT ने जो भी कार्रवाइयां की हैं, वे इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स का गंभीर उल्लंघन हैं। अवामी लीग ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि गैरलोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आई इस सरकार ने संविधान और कानूनी प्रक्रिया का खुलेआम उल्लंघन किया है। एक अध्यादेश के जरिए इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल एक्ट 1937 में मनमानी तरीके से बदलाव किया गया, ताकि अवामी लीग के नेताओं पर कानूनी ढांचे के भीतर बदला लिया जा सके। पार्टी का कहना है कि यह पूरा मामला पहले से सोची-समझी राजनीतिक साजिश है।

पार्टी ने आगे यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक बदला लेने के लिए सरकार ने जो अभियोजन और न्यायिक समितियां बनाई हैं, उनमें जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कट्टर कार्यकर्ताओं को भरा गया है। इन समितियों ने पूरी तरह झूठे और फर्जी सबूतों के आधार पर अवामी लीग के नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं पर बेबुनियाद केस दर्ज किए हैं।

इस फैसले के बाद अवामी लीग ने गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि इससे बांग्लादेश में पिछले दो साल से चल रही हिंसा की सिलसिला और भी भीषण रूप ले सकता है। पार्टी के मुताबिक, इस राजनीतिक संघर्ष में पहले ही सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है, और अब इस फैसले से मनमानी गिरफ्तारियां बढ़ेंगी और हजारों कार्यकर्ताओं की जिंदगी जेल में बर्बाद होगी। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा का हवाला देकर सरकार पुलिस हिरासत में अत्याचार कर रही है और फर्जी मुठभेड़ें करा रही है।

इसके अलावा अवामी लीग ने एक चौंकाने वाला दावा भी किया है। पार्टी का कहना है कि एक तरफ अवामी लीग के नेताओं को फांसी दी जा रही है, तो दूसरी तरफ देश के सैकड़ों खतरनाक और दोषी ठहराए जा चुके इस्लामी अतिरेकियों को जमानत पर रिहा किया जा रहा है। अवामी लीग ने चेतावनी दी है कि अल-कायदा जैसे इंटरनेशनल आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को खुला छोड़ने से बांग्लादेश अब दुनिया के सबसे खतरनाक ठिकानों में से एक बनता जा रहा है।

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