AI के खतरों पर डर फैलाना बंद करें, चीन ने वैश्विक सहयोग की मांग दोहराई
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अमेरिका और चीन के बीच नई बहस, Anthropic के CEO की चेतावनी पर चीन का पलटवार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया भर में देशों को साथ मिलकर काम करना चाहिए, ऐसी अपील चीन ने की है। चीन का कहना है कि AI से जुड़े संभावित खतरों को लेकर जो बढ़ा-चढ़ाकर कहानियां फैलाई जा रही हैं, उनसे ग्लोबल AI गवर्नेंस यानी वैश्विक AI प्रशासन को लेकर हो रहे प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है। चीन के मुताबिक AI तकनीक जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए दुनिया के सभी देशों को मिलकर इसके सुरक्षित इस्तेमाल के लिए नियम और एक फ्रेमवर्क तैयार करने की जरूरत है।
यह मुद्दा उस वक्त सामने आया है जब अमेरिका की AI कंपनी Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए AI मॉडल के विकास की रफ्तार कुछ हद तक कम करने की अपील की है। इसके बाद AI सेक्टर में चल रही तेज प्रतिस्पर्धा और उससे पैदा हो रहे सुरक्षा से जुड़े सवालों पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
चीन के मुताबिक AI अब किसी एक देश तक सीमित तकनीक नहीं रह गई है। इसका असर अर्थव्यवस्था, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। इसलिए चीन का कहना है कि AI के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। चीन ने साफ कहा है कि AI तकनीक को लेकर डर फैलाने की बजाय इसका सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल कैसे हो, इस पर दुनिया भर में चर्चा होनी चाहिए। खासकर विकासशील देशों को भी AI के विकास का फायदा मिले, इसके लिए तकनीक में सहयोग बढ़ाने की भूमिका चीन ने रखी है।
दूसरी तरफ Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने कहा है कि AI की बढ़ती क्षमता से राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षा से जुड़े खतरे बढ़ सकते हैं। उनका कहना है कि जैसे-जैसे बेहद सक्षम AI मॉडल बन रहे हैं, उनकी क्षमता और उनका गलत इस्तेमाल किस तरह हो सकता है, इसे गंभीरता से देखने की जरूरत है। इसी वजह से AI कंपनियों से सिर्फ तकनीक को ज्यादा ताकतवर बनाने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठ रही है। लेकिन चीन का नजरिया है कि डर या धमकी भरी कहानियों की बजाय असली सहयोग और नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था खड़ी करना ज्यादा जरूरी है।
AI के मामले में अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही तगड़ी तकनीकी होड़ चल रही है। दोनों ही देश अत्याधुनिक AI मॉडल, चिप्स, डेटा और कंप्यूटिंग पावर पर जोर दे रहे हैं। इस वजह से AI गवर्नेंस का मामला अब सिर्फ तकनीक तक सीमित न रहकर वैश्विक राजनीति का भी हिस्सा बन गया है।
दुनिया भर की सरकारों के सामने अब दो बड़े सवाल हैं, AI का विकास कितनी तेजी से होना चाहिए और इस पर लगाम कसने के लिए कौन से नियम होने चाहिए। चीन ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग का रास्ता सुझाया है, लेकिन AI सुरक्षा को लेकर अमेरिकी कंपनियों और जानकारों की चिंताएं अब भी बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाले वक्त में AI का विकास बनाम AI की सुरक्षा, यह टकराव और तेज होने की आशंका है।