50 साल के डायबिटिक मरीज की धमनियों में जमा कैल्शियम IVL तकनीक से हटाया, बड़ी सर्जरी टली
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने इंट्राव्हॅस्क्युलर लिथोट्रिप्सी तकनीक से मरीज की दिल की धमनियों में जमा कैल्शियम की परत हटाकर मुश्किल एंजियोप्लास्टी सफलतापूर्वक की।
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में डॉक्टरों ने 50 साल के एक डायबिटिक मरीज की एक मुश्किल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी सफलतापूर्वक कर दिखाई। इस मरीज के दिल की धमनियों में कैल्शियम की काफी मोटी परत जमी हुई थी, जिसकी वजह से इलाज आसान नहीं था। डॉक्टरों ने इसके लिए इंट्राव्हॅस्क्युलर लिथोट्रिप्सी यानी IVL नाम की अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया।
मामला ऐसे शुरू हुआ कि मरीज को दिल की धमनियों से जुड़ी बीमारी के लक्षण दिख रहे थे। जांच में पता चला कि उसकी कोरोनरी धमनियों में बड़े पैमाने पर कैल्शियम जमा हो गया है। इसके अलावा एक और दिक्कत सामने आई, पैर की धमनियों से कैथेटर ले जाने के लिए जितना रक्तप्रवाह चाहिए, वह भी पर्याप्त नहीं था। इस वजह से पैर की धमनी से पारंपरिक तरीके से इलाज करना मुश्किल हो गया था।
उम्र बढ़ने और लंबे समय से डायबिटीज होने की वजह से कोरोनरी धमनियों में कैल्शियम जमा होने का खतरा बढ़ जाता है। जब कैल्शियम की परत ज्यादा जमा हो जाती है तो धमनियां बहुत सख्त हो जाती हैं, जिससे सामान्य एंजियोप्लास्टी तकनीकी रूप से मुश्किल हो सकती है और स्टेंट पूरी तरह न फूल पाने का खतरा भी बढ़ जाता है।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मुंबई सेंट्रल के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. परिन संगोई ने बताया कि बहुत ज्यादा कैल्शियम वाली कोरोनरी धमनियां इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि कैल्शियम की वजह से धमनियां बेहद सख्त हो जाती हैं और सामान्य एंजियोप्लास्टी के जरिए स्टेंट लगाने से पहले धमनी को ठीक तरह से तैयार करना हमेशा मुमकिन नहीं होता।
धमनियों की जटिल बनावट और पैर की धमनियों से रक्तप्रवाह कम होने के बावजूद डॉक्टरों ने कलाई की रेडियल आर्टरी से ही यह पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक कर दिखाई। स्टेंट लगाने से पहले कैल्शियम की परत को कम करने के लिए IVL तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे धमनी को ज्यादा असरदार तरीके से फैलाने में मदद मिली।
डॉ. संगोई ने आगे बताया कि IVL तकनीक में नियंत्रित ध्वनि तरंगों के दबाव का इस्तेमाल करके धमनी की दीवार में जमा कैल्शियम की परत को सूक्ष्म रूप में तोड़ा जाता है। इससे धमनी ज्यादा लचीली हो जाती है और स्टेंट बेहतर तरीके से फैल पाता है। उन्होंने कहा कि सही मरीज का चुनाव किया जाए तो ज्यादा कैल्शियम जमा होने और सामान्य एंजियोप्लास्टी मुश्किल होने वाले मामलों में यह तकनीक एक अहम विकल्प बन सकती है।
यह पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई और प्रभावित कोरोनरी धमनी में रक्तप्रवाह बेहतरीन तरीके से फिर से शुरू हो गया। इलाज के बाद मरीज की तबीयत ठीक रही और उसे स्थिर हालत में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉ. संगोई ने कहा कि इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में तकनीक की तरक्की की वजह से अब बढ़ती जटिल कोरोनरी धमनियों की रुकावटों का इलाज करना मुमकिन हो रहा है, इसलिए हर बार हाई रिस्क सर्जरी का विकल्प अपनाना जरूरी नहीं रह गया है।