गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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14:29 IST

सीरिया की संसद ने असद दौर की विवादित आतंकवाद अदालत को पूरी तरह खत्म किया

सीरिया की नई संसद ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के जमाने में बनी विवादित आतंकवाद अदालत को खत्म करने वाले बिल को एकमत से मंजूरी दे दी।

सीरिया की संसद ने असद दौर की विवादित आतंकवाद अदालत को पूरी तरह खत्म किया
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मध्य पूर्व के देश सीरिया में जहां राजनीतिक बदलाव की हवा चल रही है, वहीं देश की नई संसद ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला ले लिया है। सीरिया की नई चुनी गई संसद, यानी पीपल्स असेंब्ली, ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के दौर की बदनाम और विवादित रही 'आतंकवाद अदालत' को पूरी तरह भंग करने वाले बिल को एकमत से पास कर दिया है। इस फैसले के बाद असद राज के दौरान इस अदालत ने जितने भी अन्यायपूर्ण फैसले सुनाए थे, सजाएं दी थीं और संपत्ति जब्त करने के आदेश दिए थे, वो सब खुद-ब-खुद रद्द हो गए हैं।

सरकारी टीवी चैनल अल-एखबारिया के मुताबिक संसद में हुई वोटिंग से इस अदालत के खात्मे पर औपचारिक मुहर लग गई है। बशर अल-असद की सरकार ने साल 2012 में इस खास अदालत की स्थापना की थी। ऊपर से देखने में यह अदालत आतंकवाद से लड़ने के नाम पर बनाई गई थी, लेकिन असल में असद सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले हजारों राजनीतिक विरोधियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और बेकसूर लोगों को जेल में डालने और उन पर झूठे केस चलाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता था।

असद परिवार की 53 साल की सख्त सत्ता खत्म होने के बाद बनी सीरिया की पहली लोकतांत्रिक संसद के शुरुआती हफ्तों में ही यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। नई संसद की पहली औपचारिक मीटिंग जुलाई में हुई थी। इससे पहले जून 2025 में ही राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने एक खास फरमान जारी करके इस अदालत में काम कर रहे 67 जजों को पद से हटा दिया था। उस वक्त उन्होंने इस संस्था को 'भंग की गई आतंकवाद विरोधी अदालत' कहा था।

इसके अलावा मार्च 2025 में सीरिया के लिए जारी की गई नई संवैधानिक घोषणा में यह साफ कर दिया गया था कि असद राज की इस अन्यायपूर्ण अदालत के सारे कानूनी फैसले रद्द माने जाएंगे। इसमें यह भी साफ निर्देश दिया गया था कि जिन लोगों के घर, जमीन और संपत्ति गैरकानूनी तरीके से जब्त की गई थी, वो सारी संपत्ति उनके असली मालिकों को वापस लौटाई जाए। संसद के इस ताजा फैसले से अब पीड़ित लोगों को इंसाफ मिलने का रास्ता और आसान हो गया है।

दुनिया भर में भी इस अदालत के कामकाज पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने 2024 में अपनी रिपोर्ट में 2012 के इस आतंकवाद विरोधी कानून पर सख्त चिंता जताई थी। समिति ने कहा था कि यह अदालत न तो स्वतंत्र थी और न ही निष्पक्ष, और लोगों को सही इंसाफ दिलाने में यह पूरी तरह नाकाम रही। इस अदालत के जरिए लोगों को बिना किसी पूर्व सूचना के गिरफ्तार किया जाता था, उनका बुरी तरह मानसिक और शारीरिक टॉर्चर किया जाता था और गुपचुप सुनवाई करके उन्हें कड़ी सजाएं सुनाई जाती थीं। सीरिया की जन प्रतिनिधि सभा के अपनी अंदरूनी कमेटियां और नियम तय करने के बाद लिए गए शुरुआती बड़े कानूनी फैसलों में से यह एक है।

सीरिया पर 53 साल तक अकेले राज करने वाले अल-असद परिवार की सत्ता 8 दिसंबर 2024 को आधिकारिक तौर पर खत्म हो गई थी। सीरिया के विद्रोही गुटों ने महज 11 दिनों में जो अचानक और तेज हमला किया, उससे असद की सत्ता गिर गई और उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा। इस ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद सीरिया में टॉर्चर, बेलगाम खुफिया तंत्र और लोगों को जबरन गायब करने की घटनाओं के लिए बदनाम रहे एक क्रूर पुलिस राज का अंत हो गया। अब नई संसद और शासन व्यवस्था के जरिए सीरिया में कानून, इंसाफ और मानवाधिकारों को फिर से बहाल करने की कोशिशें तेजी से चल रही हैं।

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