बुधवार, 16 सितमबर 2026

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22:43 IST

पुणे में बच्चे को कमर पर बांध कर महिला ने बजाया ढोल, वीडियो वायरल होते ही नेटकरी भड़के

पुणे में बच्चे को कमर पर बांध कर महिला ने बजाया ढोल, वीडियो वायरल होते ही नेटकरी भड़के
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गणेशोत्सव जैसे त्योहारों में महाराष्ट्र में ढोल-ताशा पथकों का जोश हर गली-मोहल्ले में दिखता है, और इसमें महिलाओं की भागीदारी भी कम नहीं रहती। ऐसे मौकों पर बना कोई ना कोई वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाता है। लेकिन इस बार पुणे से आया एक वीडियो तारीफ की बजाय जबरदस्त विवाद और लोगों के गुस्से का कारण बन गया है।

इस वायरल वीडियो में एक महिला अपने कुछ महीने के छोटे और नाजुक बच्चे को कमर-मांडी पर बांधकर, पूरे जोश में दोनों हाथों से पूरी ताकत लगाकर ढोल बजाती दिख रही है। वीडियो में महिला का उत्साह और वादन का जोश तो साफ नजर आ रहा है, लेकिन उसकी छाती से चिपका वह छोटा बच्चा ढोल और झांझ की तेज और कर्कश आवाज में बेबस और परेशान दिखाई दे रहा है। इंस्टाग्राम और बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आते ही यह वीडियो थोड़ी ही देर में लाखों लोगों तक पहुंच गया।

वीडियो सामने आने के बाद शुरुआत में कुछ लोगों ने इसे महिला सशक्तिकरण के नजरिए से सराहने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही आलोचकों की तादाद बहुत बढ़ गई। सोशल मीडिया यूजर्स और नेटकरियों ने महिला के इस कदम को तीखे शब्दों में लताड़ा है। लोगों का साफ कहना है कि खुद को एक आधुनिक, मजबूत और सक्षम महिला साबित करने के चक्कर में एक छोटे और नाजुक बच्चे की सेहत और जान को खतरे में डालना किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता।

एक यूजर ने ट्विटर पर लिखा कि सोशल मीडिया पर पॉपुलैरिटी पाने के लिए लोग किस हद तक जा सकते हैं और कैसी-कैसी स्टंटबाजी कर सकते हैं, इसका कोई अंदाजा नहीं है। इस यूजर ने आगे लिखा कि 0 से 3 साल तक बच्चे के कान पूरी तरह विकसित नहीं होते और दिमाग का विकास भी पूरा नहीं हुआ होता, इसलिए स्वाभाविक रूप से इतने छोटे बच्चे तेज और कर्कश आवाज बर्दाश्त नहीं कर पाते।

लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाओं में लिखा कि त्योहार का जोश और ढोल बजाने का शौक तारीफ के काबिल है, लेकिन एक जिम्मेदार मां के तौर पर अपने छोटे बच्चे को ढोल-ताशों की तेज आवाज और भीड़ से दूर रखना उसकी पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए थी। नेटकरियों का आरोप है कि सिर्फ पॉपुलैरिटी पाने या यह दिखाने के लिए कि वह कुछ भी कर सकती है, अपने ही बच्चे की सुरक्षा को नजरअंदाज करना गैरजिम्मेदारी की हद है।

इस वीडियो पर बात करते हुए कई लोगों ने छोटे बच्चों की सेहत और खासकर उनकी सुनने की क्षमता को लेकर गहरी चिंता जताई है। डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक नवजात और छोटे बच्चों के कान बेहद नाजुक और संवेदनशील होते हैं। ढोल-ताशा पथकों की आवाज का लेवल अक्सर 100 से 120 डेसिबल से भी ज्यादा हो जाता है। इतनी तेज आवाज के सीधे संपर्क में आने से बच्चों के कान के पर्दे फट सकते हैं, उन्हें हमेशा के लिए बहरापन आ सकता है या उनके दिमाग की कोशिकाओं पर बुरा असर पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने गुस्से में लिखा कि कोई इस मां को समझाए कि खुद की पॉपुलैरिटी से ज्यादा बच्चे के कान और सेहत जरूरी है। वहीं एक और नेटकरी ने लिखा कि महिला को कब मजबूत रहना है, कब भावुक होना है और कब मां के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों को पहले रखना है, यह समझना ही महिला सशक्तिकरण का असली और सही मतलब है। फिलहाल यह वीडियो विवाद में घिरा हुआ है, जिसके बाद छोटे बच्चों की सुरक्षा और सार्वजनिक त्योहारों में मां-बाप की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

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