गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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17:32 IST

नागपुर के व्यापारी बोले, UPI पर शुल्क लगा तो नकद भुगतान बढ़ाएंगे

बड़े यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगने के फैसले से नागपुर के व्यापारी नाराज हैं और नकद भुगतान की तरफ जाने की तैयारी कर रहे हैं।

नागपुर के व्यापारी बोले, UPI पर शुल्क लगा तो नकद भुगतान बढ़ाएंगे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

यूपीआई से होने वाले बड़े व्यापारी भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने का फैसला हुआ है, और इसके बाद से व्यापारिक संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। नागपुर के कई व्यापारियों का कहना है कि इस अतिरिक्त लागत का बोझ बढ़ने से अब यूपीआई भुगतान उनके लिए महंगा पड़ेगा, और इसका सीधा असर ग्राहकों के भुगतान के तरीके पर भी पड़ सकता है।

स्थिति यह है कि कुछ व्यापारी संगठन अब ग्राहकों को बड़े भुगतान के लिए नकद देने की तरफ प्रोत्साहित करने की तैयारी में जुट गए हैं। नियम के मुताबिक 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति लेन-देन तक रहेगा।

व्यापारियों ने साफ किया है कि उन्होंने सरकार की डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की पहल का समर्थन किया था, लेकिन अगर उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे नकद भुगतान को ही बढ़ावा देंगे। तेल व्यापारी अनिल अग्रवाल का कहना है, हम पहले से ही लेन-देन शुल्क और 18 प्रतिशत जीएसटी दे रहे है। अब अगर सरकार हमसे यूपीआई एमडीआर भी वसूलती है तो हम नकद भुगतान को बढ़ावा देंगे। अगर यूपीआई लेन-देन पर भी शुल्क लगाया जाता है तो हम इसका समर्थन नहीं करेंगे और नकद भुगतान को बढ़ावा देना शुरू करेंगे।

बर्तन व्यापारी महावीर लटुरिया के मुताबिक नागपुर जिले के दुकानदारों और व्यापारियों को अब नकद भुगतान की ओर जाना चाहिए। उनका कहना है कि अतिरिक्त शुल्क के इस फैसले के बाद कम मुनाफे पर काम करने वाले व्यापारियों के लिए यूपीआई भुगतान महंगा विकल्प बन जाएगा। यूपीआई को शुरू ही व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए डिजिटल भुगतान आसान बनाने के लिए किया गया था, लेकिन अगर 2,000 रुपये से ज्यादा के लेन-देन पर व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो उनमें से बहुत से लोग नकद भुगतान को ही प्राथमिकता देंगे।

इलेक्ट्रिक मार्केट के व्यापारी जवाहर पटेल कहते हैं, हमे डिजिटल भुगतान से कोई समस्या नहीं है लेकिन अतिरिक्त लागत व्यापारियों पर नहीं डाली जानी चाहिए। उनके मुताबिक व्यापारी पहले से ही क्रेडिट कार्ड लेन-देन पर एमडीआर का विरोध कर रहे है और अब उन्हें यूपीआई भुगतान पर भी शुल्क का सामना करना पड़ेगा। पटेल का कहना है कि बड़े भुगतान के लिए व्यापारी अब थोक विक्रेताओं और दूसरे कारोबारियों को चेक और बैंकिंग माध्यमों से पैसा देने पर भी विचार करेंगे।

व्यापारी विराग संघवी का कहना है कि इस शुल्क से परेशानी और बढ़ेगी। 2,000 रुपये से अधिक का यूपीआई भुगतान लेने वाले छोटे, मझोले और थोक कारोबारियों के लिए लागत बढ़ जाएगी। छोटा सा शुल्क भी एक महीने या पूरे साल में जोड़ें तो बड़ा खर्च बन सकता है, और यह नया शुल्क छोटे दुकानदारों के लिए परेशानी खड़ी करेगा।

वित्त मंत्रालय की तरफ से 15 सितंबर 2026 को कहा गया था कि यूपीआई पीयर-टू-पीयर लेन-देन और 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन के लिए मुफ्त बना रहेगा, और नए यूपीआई ढांचे का किसी भी व्यक्ति-से-व्यक्ति लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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