EPF-EPS की सैलरी लिमिट 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार, 51 लाख कर्मचारियों को फायदा
केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को PF और पेंशन स्कीम के लिए तय सैलरी लिमिट बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है, जिससे लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। बुधवार 16 सितंबर को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह तय हुआ कि 'कर्मचारी भविष्य निर्वाह निधी' यानी EPF और 'कर्मचारी पेंशन योजना' यानी EPS के तहत जो सैलरी लिमिट अभी तक 15 हजार रुपये महीना थी, उसे सीधे बढ़ाकर 25 हजार रुपये महीना कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला करोड़ों कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा और दूरगामी कदम है।
इस फैसले से देशभर में 51 लाख से ज्यादा नए कर्मचारी सीधे सोशल सिक्योरिटी के दायरे में आ जाएंगे। जो कर्मचारी अभी तक 15 हजार से 25 हजार रुपये की सैलरी रेंज में आने की वजह से अनिवार्य PF स्कीम से बाहर थे, उन्हें अब इस स्कीम का कानूनी फायदा मिलेगा। इससे देश में असंगठित रोजगार को औपचारिक रूप देने में भी तेजी आएगी।
इससे पहले 1 सितंबर 2024 को PF के लिए अनिवार्य सैलरी लिमिट 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये की गई थी। उसके बाद पिछले 12 सालों में कर्मचारियों की सैलरी, महंगाई और रहन-सहन का खर्च काफी बढ़ गया था। बढ़ती सैलरी के हिसाब से तालमेल बिठाने और रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी सुरक्षित करने के लिए ही केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया है।
सैलरी लिमिट बढ़ने से कर्मचारियों को सिर्फ PF का ही फायदा नहीं मिलेगा, बल्कि तीन अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी स्कीमों का फायदा मिलेगा। पहला, EPF यानी भविष्य निर्वाह निधि, जिसमें रिटायरमेंट के लिए चक्रवृद्धि ब्याज के साथ बड़ी बचत होती है। दूसरा, EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना, जिसमें रिटायरमेंट के बाद जिंदगीभर तय मासिक पेंशन की गारंटी मिलती है। और तीसरा, EDLI यानी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस, जिसमें किसी दुर्घटना की स्थिति में कर्मचारी के परिवार को लाइफ इंश्योरेंस का सुरक्षा कवर मिलता है।
सैलरी लिमिट भले ही 25 हजार रुपये कर दी गई है, लेकिन इसका ध्यान रखा गया है कि कंपनियों और नियोक्ताओं पर अचानक कोई बड़ा फाइनेंशियल बोझ न पड़े। कंपनियां चाहें तो अपने अनिवार्य योगदान की गणना के लिए अभी की 15 हजार रुपये की लिमिट का ही ऑप्शन इस्तेमाल कर सकती हैं। इस तरह PF का दायरा तो बढ़ेगा, लेकिन कंपनियों का फाइनेंशियल गणित नहीं बिगड़ेगा।
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट मिनिस्ट्री और EPFO इस फैसले को लागू करने के लिए जल्द ही कानूनी संशोधन और प्रशासनिक सर्कुलर जारी करेंगे। इसके बाद सभी रजिस्टर्ड कंपनियों में यह नई सैलरी लिमिट लागू कर दी जाएगी।